लखनऊ,14 जून( चौथा प्रहरी)।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का गो संरक्षण मॉडल अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी चर्चा का विषय बन रहा है। प्रदेश में देसी गायों से तैयार होने वाले पंचगव्य और आयुर्वेदिक उत्पाद अमेरिका, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों समेत कई देशों तक पहुंच रहे हैं। सरकार का दावा है कि गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की नीति ने यूपी को नई पहचान दिलाई है। इसी वजह से देश के कई राज्यों के लोग यहां आकर गो संरक्षण और उससे जुड़े व्यवसाय की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

प्रदेश में देसी गायों के माध्यम से तैयार किए जा रहे करीब 200 प्रकार के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना चुके हैं। इनमें पंचगव्य घृत, ब्राह्मी घृत, गोमूत्र अर्क, घनवटी, च्यवनप्राश, गो घृत, शतधौता घृत और आयुर्वेदिक काजल जैसे उत्पाद शामिल हैं। अमेरिका, कनाडा, यूएई, सिंगापुर, मलेशिया, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सऊदी अरब और थाईलैंड जैसे देशों में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली के प्रति बढ़ती रुचि को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश ने गो संरक्षण को केवल धार्मिक या सामाजिक विषय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा है। गोबर, गोमूत्र, घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों को व्यवस्थित उद्योग का रूप दिया जा रहा है। इससे गांवों में स्वयं सहायता समूहों, गोशालाओं और छोटे उद्यमियों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं।
इस बदलाव की एक मिसाल गाजियाबाद के असीम रावत हैं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद उन्होंने देसी गायों के संरक्षण और गो-आधारित उत्पादों के निर्माण का रास्ता चुना। उनकी पहल ‘हेता (HETHA)’ आज देश और विदेश के बाजारों तक पहुंच चुकी है। असीम रावत का कहना है कि यदि देसी गायों से जुड़े उत्पादों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर बाजार से जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
यूपी का यह मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत 15 से अधिक राज्यों के लोग यहां प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्हें गो संरक्षण, नस्ल सुधार और गो-आधारित उत्पादों के व्यावसायिक मॉडल की जानकारी दी जाती है।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार सरकार उन्नत देसी नस्ल की गायों के पालन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और थारपारकर जैसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने डेयरी और गो-आधारित उद्योग को नई गति दी है, जिससे किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिली है।
आने वाले समय में यदि गो संरक्षण और गो-आधारित उद्योग को इसी तरह बढ़ावा मिलता रहा तो यह ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकता है। साथ ही उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों और विदेशी संस्थाओं के लिए भी अध्ययन और अनुकरण का विषय बन सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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