लखनऊ, 15 जून( चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश सरकार गांवों में रोजगार बढ़ाने और गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार प्रदेश की 7500 से अधिक गोशालाओं के माध्यम से पंचगव्य क्लस्टर विकसित करेगी। इन क्लस्टरों में 40-40 युवाओं की टीमें काम करेंगी। इस पहल से करीब तीन लाख युवाओं को स्वरोजगार और आय के अवसर मिलने की संभावना है। महिला स्वयं सहायता समूहों, किसानों और ग्रामीण युवाओं को योजना में प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार का उद्देश्य गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र तक सीमित नहीं रखना है। उन्हें ग्रामीण उत्पादन और रोजगार के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पंचगव्य क्लस्टरों में देसी गायों से प्राप्त दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का उपयोग कर कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
इन क्लस्टरों में जैविक खाद, जैव उर्वरक, जैविक कीटनाशक, धूपबत्ती, साबुन, पेंट, औषधियां और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं का उत्पादन होगा। सरकार इन उत्पादों के विपणन की व्यवस्था भी क्लस्टर स्तर पर विकसित करने की तैयारी कर रही है, ताकि ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि पंचगव्य क्लस्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनका कहना है कि इससे गो-आधारित उद्योगों को संगठित स्वरूप मिलेगा और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों की लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
योजना के तहत प्रदेश की सभी 7500 गोशालाओं को क्लस्टर मॉडल से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक क्लस्टर में 40 युवाओं की टीम बनाई जाएगी। यह टीम उत्पादन, गुणवत्ता, प्रबंधन और विपणन से जुड़ी गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालेगी। महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है। गोशालाओं के माध्यम से आय सृजन का यह मॉडल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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