लखनऊ,23जून(चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ मेट्रो के विस्तार को एक बड़ा कदम मिला है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1बी) के एलिवेटेड हिस्से के निर्माण के लिए लगभग 384 करोड़ रुपये का सिविल निर्माण टेंडर आवंटित कर दिया है। यह काम मेसर्स रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड को सौंपा गया है। कंपनी ठाकुरगंज से वसंतकुंज तक एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर और पांच एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों का डिजाइन और निर्माण करेगी। परियोजना को कार्य शुरू होने की तारीख से 24 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यूपीएमआरसी के अनुसार, यह टेंडर पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के तहत दिया गया। तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड को सफल बोलीदाता चुना गया। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना शहर में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करेगी और लोगों को बेहतर यात्रा सुविधा उपलब्ध कराएगी।
परियोजना के तहत करीब 4.6 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड मेट्रो वायाडक्ट बनाया जाएगा। इसके अलावा मुख्य लाइन को डिपो से जोड़ने के लिए 740 मीटर लंबा रैंप भी तैयार किया जाएगा। निर्माण कार्य में स्टेशन भवनों के साथ-साथ जल आपूर्ति, स्वच्छता, ड्रेनेज, अग्निशमन, विद्युत और यांत्रिक व्यवस्थाओं का विकास भी शामिल है।
इस कॉरिडोर में पांच एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, मूसाबाग और वसंतकुंज मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। ये स्टेशन शहर के घनी आबादी वाले इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेंगे।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि टेंडर का आवंटन लखनऊ मेट्रो फेज-1बी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुसार यह कॉरिडोर नागरिकों को आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना को समयबद्ध तरीके से और गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा किया जाएगा।
यूपीएमआरसी पहले ही वसंतकुंज मेट्रो डिपो के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर चुका है। वहीं ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के भूमिगत हिस्से के निर्माण के लिए भी जल्द टेंडर जारी किया जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर में कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें 5 एलिवेटेड और 7 भूमिगत स्टेशन शामिल होंगे।
परियोजना पूरी होने के बाद शहर के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनेगी। इससे सड़क यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है और लोगों को निजी वाहनों के बजाय तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर लखनऊ के शहरी विकास और यातायात प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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