रायबरेली,30जून(चौथा प्रहरी)। जिला चिकित्सालय में मरीज के साथ अभद्र व्यवहार और पैर से मारने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर संबंधित स्वीपर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि मरीजों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

30 जून को जारी जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें अस्पताल की एक कर्मचारी मरीज के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती और पैर से मारती हुई दिखाई दी। वीडियो सामने आने के बाद उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले का गंभीर संज्ञान लिया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार, दुर्व्यवहार या सेवा नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निर्देशों के पालन में रायबरेली जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पेन्द्र कुमार ने स्वीपर पिंकी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कर्मचारी का आचरण कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के प्रावधानों के खिलाफ पाया गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
निलंबन अवधि के दौरान संबंधित कर्मचारी को जिला चिकित्सालय के आयुष विभाग की ओपीडी से संबद्ध किया गया है। मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति में अस्थि शल्य चिकित्सा विभाग के परामर्शदाता डॉ. दिनेश प्रताप सरोज, माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. ऋचा और सिस्टर सुषमा यादव को जांच अधिकारी बनाया गया है।
सरकार का कहना है कि अस्पतालों में आने वाले हर मरीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए दोषियों के खिलाफ बिना देरी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कर्मचारी दोषी पाई जाती है तो आगे भी विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में मरीजों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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