लखनऊ,02जुलाई(चौथा प्रहरी)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर बिजनौर में विस्थापित मछुआरा समुदाय के लिए विशेष विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर लगाया गया। 1 जुलाई को आयोजित इस शिविर में लोगों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई, सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई और लोक अदालत के माध्यम से 20 मामलों का निस्तारण किया गया। साथ ही 42 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।
यह पहल राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश के विस्थापित, अनुसूचित जनजाति, वनवासी और अन्य वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना तथा उनके अधिकारों की रक्षा करना है।
बिजनौर के समग्र विद्यालय, ग्राम नवलपुर बैराज में आयोजित शिविर में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. मनु कालिया, जनपद न्यायाधीश संजय कुमार-VII, जिलाधिकारी जसजीत कौर, पुलिस अधीक्षक डॉ. के.जी. सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाती चंद्रा सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
शिविर के दौरान अधिकारियों ने विस्थापित मछुआरा समुदाय के लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों की सेवाओं की जानकारी दी। लोगों ने अपनी समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखीं, जिनके समाधान का भरोसा दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विशेष लोक अदालत का आयोजन भी किया गया। इसमें आपसी सहमति के आधार पर 20 मामलों का निस्तारण हुआ। इससे लोगों को बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के राहत मिली।
प्रशासन ने तय किया है कि शिविर समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर पात्र लोगों का पंजीकरण कर उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इसकी पूरी रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाएगी।
शिविर में मेडिकल कैंप भी लगाया गया। डॉक्टरों की टीम ने 42 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जरूरतमंदों को परामर्श के साथ दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
प्रशासन ने यह भी घोषणा की कि विस्थापित परिवारों की अन्य चार बस्तियों—घासी वाला, हेमराज, चांदपुरा और धर्मनगरी—में भी इसी तरह के शिविर लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
आगे क्या असर होगा-बिजनौर से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक पहुंचाई जाएगी। इससे वंचित और विस्थापित समुदायों को कानूनी सहायता, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सेवाओं तक आसान पहुंच मिलने की उम्मीद है। साथ ही ऐसे लोगों और प्रशासन के बीच संवाद भी मजबूत होगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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