लखनऊ, 21जुलाई(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश सरकार ने नवगठित आउटसोर्स सेवा निगम को मजबूत करने के लिए बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। मंगलवार को लखनऊ में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में निगम को 20 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण देने की मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि इससे निगम की शुरुआती व्यवस्थाएं खड़ी करने, प्रशासनिक ढांचा विकसित करने और आउटसोर्स सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

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उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम अभी अपने शुरुआती चरण में है। ऐसे में कार्यालय संचालन, कर्मचारियों की व्यवस्था, तकनीकी ढांचा तैयार करने और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को स्थापित करने के लिए पूंजी की जरूरत थी। इसी जरूरत को देखते हुए राज्य सरकार ने ब्याजमुक्त ऋण देने का फैसला किया है।
सरकार के अनुसार यह निगम लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया है। इसका मुख्य काम सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना होगा। इससे अलग-अलग विभागों में आउटसोर्स सेवाओं के संचालन के लिए एक समान व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट के फैसले के तहत निगम को अगले पांच वर्षों तक इस ऋण की कोई किस्त नहीं चुकानी होगी। इसके बाद छठे वर्ष से हर साल दो करोड़ रुपये की दर से दस वर्षों में पूरी राशि वापस की जाएगी। इस दौरान निगम अपनी आय के जरिए ऋण का भुगतान करेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि एक केंद्रीय व्यवस्था बनने से आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही विभागों को भी एक तय प्रक्रिया के तहत सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
क्या है उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम?
कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा-8 के तहत गठित गैर-लाभकारी संस्था।
उद्देश्य सरकारी विभागों में आउटसोर्स सेवाओं का बेहतर प्रबंधन।
पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था विकसित करना।
शुरुआती वर्षों में प्रशासनिक और तकनीकी ढांचा तैयार करना।
आगे क्या असर होगा?
यदि निगम तय योजना के अनुसार काम करता है तो प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक एकरूप हो सकती है। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ने, सेवा प्रदाताओं की निगरानी मजबूत होने और सार्वजनिक सेवाओं के संचालन में सुधार की संभावना है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निगम अपने संचालन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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