अयोध्या,31जुलाई(चौथा प्रहरी)। संसद परिसर के बाहर विपक्षी दलों के हालिया प्रदर्शन पर अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया और कहा कि धार्मिक प्रतीकों तथा सनातन आस्था को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि संसद बहस और कानून बनाने का मंच है, जबकि विरोध का तरीका लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए।

महापौर ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि विपक्ष जनता के बीच राजनीतिक संदेश देने के लिए ऐसे प्रदर्शन कर रहा है। उनके अनुसार केंद्र सरकार की नीतियों और जनसमर्थन के कारण विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, लेकिन इससे आम लोगों के मुद्दों का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि संसद का समय देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए है। यदि सदन में बार-बार हंगामा होता है तो कानून निर्माण और जनहित के कई मुद्दे प्रभावित होते हैं। उन्होंने विपक्ष से संसदीय परंपराओं का सम्मान करने की अपील भी की।
महापौर ने हाल के वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए गए हैं। उनका दावा है कि इससे युवाओं में भरोसा बढ़ा है।
राम मंदिर और अयोध्या के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के बाद शहर में धार्मिक पर्यटन, आधारभूत ढांचे और सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। उनके अनुसार इससे देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास और मजबूत हुआ है।
संसद परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर किए गए विपक्षी प्रदर्शन पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक विरोध में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे करोड़ों रामभक्तों और सनातन परंपरा से जुड़ी भावनाओं के खिलाफ बताया।
महापौर ने विपक्ष पर धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया। साथ ही दावा किया कि प्रदेश की जनता इस तरह की राजनीति को समझ रही है और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा।
आगे क्या?
संसद के भीतर और बाहर जारी राजनीतिक टकराव के बीच ऐसे बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकते हैं। राम मंदिर, सनातन और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगे भी प्रमुख चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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