यूपी में 6,252 नए लेखपालों की विभागीय परीक्षा पास, राजस्व विभाग को मिलेगी नई ताकत
लखनऊ,03अगस्त(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश की राजस्व व्यवस्था को जल्द बड़ी संख्या में नए लेखपाल मिलने जा रहे हैं। राजस्व परिषद ने सीधी भर्ती से चयनित 6,252 प्रशिक्षु लेखपालों की विभागीय अर्हकारी परीक्षा-2025 का परिणाम मंजूर कर दिया है। इसके साथ ही इन अभ्यर्थियों की सेवा से जुड़ी आगे की प्रक्रिया तेज होने का रास्ता साफ हो गया है।

इन सभी प्रशिक्षु लेखपालों ने प्रदेश के अलग-अलग मंडलीय राजस्व प्रशिक्षण विद्यालयों में निर्धारित प्रशिक्षण पूरा किया था। प्रशिक्षण के बाद विभागीय परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम अब स्वीकृत कर दिया गया है। अगले चरण में सफल अभ्यर्थियों के अंक-पत्र तैयार कर संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से वितरित किए जाएंगे।
प्रदेश के लखनऊ, आजमगढ़, मऊ, गोरखपुर, महोबा, प्रयागराज, बिजनौर, बरेली और फिरोजाबाद स्थित प्रशिक्षण संस्थानों में इन अभ्यर्थियों को राजस्व कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें भूमि अभिलेख, नामांतरण, सीमांकन, विरासत, अंश निर्धारण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं की जानकारी शामिल रही।
राजस्व विभाग के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से कई जिलों में लेखपालों की कमी महसूस की जा रही थी। बड़ी संख्या में प्रशिक्षित कर्मियों के उपलब्ध होने से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को राजस्व संबंधी सेवाएं समय पर मिल सकेंगी।
राजस्व परिषद ने प्रशिक्षण विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि नियमानुसार अंक-पत्र तैयार कर उन्हें जल्द संबंधित जिलों तक भेजा जाए। इसके बाद जिलास्तर पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने सफल अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लेखपाल ग्रामीण प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने अपेक्षा जताई कि नए लेखपाल पारदर्शिता, जिम्मेदारी और तकनीक के बेहतर उपयोग के साथ लोगों को बेहतर सेवाएं देंगे।
क्या होगा असर?
6,252 नए लेखपालों के कार्यभार संभालने के बाद भूमि रिकॉर्ड से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना है। नामांतरण, सीमांकन, विरासत और रिकॉर्ड सुधार जैसे कार्यों में लंबा इंतजार कम हो सकता है। डिजिटल राजस्व सेवाओं के विस्तार में भी इनकी अहम भूमिका रहने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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