लखनऊ, 04अगस्त(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में खेती और किसानों से जुड़े कई विभागों के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया है। मंगलवार को विधानसभा में पेश बजट में बागवानी, खाद्य एवं रसद, पशुपालन, डेयरी और कृषि ढांचे को मजबूत करने वाली योजनाओं पर खास जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, फसलों के बेहतर दाम दिलाना और किसानों की आय बढ़ाने वाली योजनाओं को आगे बढ़ाना बताया गया है।

इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा भामाशाह भाव स्थिरता कोष के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह कोष आलू, टमाटर और प्याज जैसी फसलों के दाम में तेज गिरावट के समय किसानों को राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक कम झेलना पड़ेगा।
बागवानी क्षेत्र के लिए भी अतिरिक्त राशि रखी गई है। निजी शीतगृहों में रखे आलू के भंडारण शुल्क पर अनुदान के लिए 100 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे किसानों पर भंडारण का खर्च कम करने की कोशिश की जाएगी। मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना, राज्य औद्यानिक विकास योजना और सरदार वल्लभभाई पटेल एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए भी अलग-अलग धनराशि तय की गई है। आगरा स्थित अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र तक संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए भी बजट रखा गया है।
खाद्य एवं रसद विभाग के लिए 254.88 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर सबसे अधिक खर्च किया जाएगा। इसका मकसद पात्र परिवारों तक खाद्यान्न की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रखना है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को भी इस बार बजट में अच्छी हिस्सेदारी मिली है। दुग्धशाला विकास विभाग के लिए 211.25 करोड़ रुपये और पशुधन विभाग के लिए 78.62 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नंद बाबा दुग्ध मिशन, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और गो आश्रय केंद्रों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं के लिए भी धन दिया गया है।
खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बीज, जैव उर्वरक और कृषि अनुसंधान पर भी अतिरिक्त खर्च किया जाएगा। प्रमाणित बीजों पर अनुदान, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों की उपलब्धता, बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, कृषि विश्वविद्यालयों के उपकरण और शोध कार्यों के लिए अलग से धन रखा गया है। गन्ना किसानों की सुविधा के लिए मैकेनिकल गन्ना कटाई मशीन खरीदने तथा शाहजहांपुर स्थित गन्ना शोध परिषद को भी अतिरिक्त सहायता दी गई है।
आगे क्या असर होगा?
यदि बजट में घोषित धनराशि समय पर जारी होती है और योजनाएं तय समय में लागू होती हैं तो किसानों को भंडारण, बीज, जैव उर्वरक, डेयरी और कृषि ढांचे से जुड़ी सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सकता है। बागवानी और पशुपालन पर बढ़ा निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखकर आय के दूसरे स्रोत भी बढ़ाने में मदद कर सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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