संवाददाता चौथा प्रहरी
बरेली। जमीन के लालच में इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला कैंट क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक जिंदा व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उसकी करोड़ों की पैतृक संपत्ति पर कब्जा कर लिया गया। इतना ही नहीं, गांव की ही एक महिला को उसकी बेटी बताकर पूरी जमीन का वारिस बना दिया गया। पीड़ित की शिकायत पर कैंट थाने में पूर्व ग्राम प्रधान सहित 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
तीर्थ यात्रा पर गया, पीछे से मृत घोषित कर दिया
मामला कैंट थाना क्षेत्र के वभिया गांव का है। गांव निवासी जानकी पुत्र दीपचंद अविवाहित हैं और निसंतान हैं। आरोप है कि जब वह कुछ समय के लिए तीर्थयात्रा पर गए थे, तो इसी का फायदा गांव की रहने वाली रामवती पत्नी महेंद्र पाल ने उठा लिया।
जानकी का आरोप है कि रामवती ने तत्कालीन ग्राम प्रधान रामपाल के साथ सांठगांठ करके उनका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा दिया। कागजों में जानकी को मृत दिखा दिया गया, जबकि वह जीवित थे।
फर्जी बेटी बनकर खतौनी में चढ़वा लिया नाम
मृत्यु प्रमाणपत्र बनने के बाद साजिश का दूसरा चरण शुरू हुआ। आरोप है कि रामवती ने तत्कालीन चकबंदी सदस्य सुल्तान सिंह और अन्य लोगों की मदद से खुद को जानकी की सगी बेटी और एकमात्र वारिस के रूप में दर्शा दिया।
2 जुलाई 2004 को चकबंदी विभाग के रिकॉर्ड में हेरफेर कर जानकी का नाम काटकर रामवती का नाम दर्ज करा दिया गया। पीड़ित का कहना है कि रामवती से उनका कोई पारिवारिक संबंध ही नहीं है।
जब जानकी को इस धोखाधड़ी का पता चला तो उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी। करीब 9 साल की जद्दोजहद के बाद 15 जनवरी 2013 को खतौनी से रामवती का नाम हटाकर दोबारा जानकी का नाम दर्ज हो सका। लेकिन तब तक जमीन पर बड़ा खेल हो चुका था।
पहले जमीन रखी गिरवी, फिर कर दिए कई बैनामे
शिकायत के मुताबिक, खतौनी में नाम आते ही रामवती ने 20 अक्टूबर 2011 को बरेली स्थित उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक से मुर्गी फार्म के नाम पर 60 हजार रुपये का कर्ज ले लिया। इसके लिए जानकी की जमीन को ही बैंक में बंधक रख दिया। बैंक रिकॉर्ड में यह बंधक आज भी कायम है और ब्याज जोड़कर कर्ज की रकम 2025 तक करीब 3 लाख 30 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।
आरोप यह भी है कि 14 मई 2012 को इसी जमीन के कई हिस्सों के बैनामे ओम प्रकाश, अजय पाल और विजेंद्र के नाम कर दिए गए। शिकायत में इन बैनामों की कुल कीमत करीब 20.88 लाख रुपये बताई गई है। इस पूरे फर्जीवाड़े में दस्तावेज लेखक राजकुमार सक्सेना उर्फ राजू और गवाह नितिन की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है।
जानकी का आरोप है कि जमीन यहीं तक नहीं रुकी, आगे उसके कई टुकड़े कर अलग-अलग लोगों को बेचा गया, अवैध रूप से कब्जा किया गया और कृषि भूमि पर अवैध खनन कर उसे बर्बाद कर दिया गया।
समझौते के नाम पर दिया बाउंस चेक, धमकी का आरोप
विवाद बढ़ने पर 19 अगस्त 2025 को दोनों पक्षों में नोटरी पर लिखित समझौता हुआ। जानकी के मुताबिक, समझौते में रामवती पक्ष ने फर्जी तरीके से नाम चढ़वाने की बात स्वीकार की और बैंक का कर्ज चुकाने के लिए 3 लाख 50 हजार रुपये का चेक दिया। लेकिन जब चेक बैंक में लगाया गया तो खाते में पैसे न होने से वह बाउंस हो गया।
पीड़ित का आरोप है कि अब जमीन वापस मांगने पर रामवती, उसका पति महेंद्र पाल और ससुर रामपाल गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
एसएसपी से शिकायत के बाद 10 पर एफआईआर
पीड़ित जानकी ने मामले की शिकायत एसएसपी अनुराग आर्य से की। एसएसपी के आदेश पर कैंट पुलिस ने रामवती, महेंद्र पाल, पूर्व प्रधान रामपाल, चकबंदी सदस्य सुल्तान सिंह, ओम प्रकाश, अजय पाल, विजेंद्र, रामभजन, नितिन और राजकुमार सक्सेना उर्फ राजू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
पुलिस अब इस बात की जांच में जुटी है कि आखिर जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कैसे हुआ, बिना किसी रक्त संबंध के महिला को बेटी कैसे दिखा दिया गया और राजस्व रिकॉर्ड में नाम कैसे चढ़ गया।





