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लखनऊ न्यूज:संभागीय परिवहन कार्यालय लखनऊ में काउंटरों पर प्राइवेट व्यक्तियों को रखने का कौन है गुनहगार

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संभागीय परिवहन कार्यालय लखनऊ में काउंटरों पर प्राइवेट व्यक्तियों को रखने का कौन है गुनहगार

पटल सहायक के साथ काउंटरों पर प्राइवेट किसके इशारे पर कर रहे हैं कार्य

लखनऊ,चौथा प्रहरी(ब्यूरो) 24 नवंबर। प्रदेश के संभागीय परिवहन अधिकारी तथा उप संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालयों में निजी दलालों और एजेंटो की सक्रियता एक आम समस्या बन चुकी है,जो आए दिन वाहन चालक लाइसेंस तथा वाहन पंजीकरण जैसी परिवहन सेवाओं में लोगों को धोखा देने या ज्यादा धन वसूलने के लिए जानी जाती है। यक्ष प्रश्न यह है कि संभागीय परिवहन अधिकारी तथा उप संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय में इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई नियम कानून हैं सवाल यह है कि प्राइवेट व्यक्तियों के साथ संलिप्त होने पर अधिकारियों कर्मचारियों पर शासकीय कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। बल्कि संभागीय कार्यालय में फिर भी दलाल इस काम में लगे हुए है। सोशल मीडिया पर तेजी से एक फोटो वायरल है जो संभागीय परिवहन अधिकारी ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ कार्यालय के भीतर काउंटर नंबर 4 पर बैठे व्यक्ति जुनैद का बताया जाता है। इस काउंटर पर पटल सहायक रईस कुरैशी तैनात बताए जाते है। बताते हैं कि पटल सहायक रईस कुरैशी प्राइवेट व्यक्ति जुनैद को अपने काउंटर पर बैठाकर कंप्यूटर चलाने का कार्य करता है। सूत्र कहते हैं कि पंजीयन अनुभाग में अतुल कुमार मिश्रा लाइसेंस अनुभाग में गणेश शर्मा व रिंकू इसी तरह संभागीय परिवहन कार्यालय में ऐसे कई व्यक्ति हैं जो प्राइवेट हैं और संभागीय परिणाम अधिकारी कार्यालय में कार्य करते हैं लेकिन उन पर संभागीय परिवहन अधिकारी संजय कुमार तिवारी और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह को नहीं दिख रहे हैं। या फिर जानकर अनजान बने हुए हैं। लेकिन प्राइवेट व्यक्ति संभागीय परिवहन कार्यालय में कार्य कैसे कर रहे हैं इस बाबत पूछे जाने पर अधिकारियों की घिग्गी बध जाती है और अपने कर्तव्यों के निर्वहन से बचने के लिए ठीकरा कंपनी के प्राइवेट कर्मियों पर परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर फोड रहे हैं। जिसे लेकर परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने पत्र भी लिख दिया।
बहरहाल परिवहन विभाग से कंपनी के 320 प्राइवेट कर्मचारियों को बाहर निकालने का मुद्दा शनिवार दिनभर सुर्खियों में रहा। दलालों से कर्मियों की सांठगांठ पर जांच नहीं करवाने, स्मार्ट चिप को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई से बचाने, एक दशक तक चुप्पी साधे रहने सहित कई सवाल हैं, लेकिन परिवहन आयुक्त के पास उनके जवाब नहीं हैं। ऐसे में कर्मी मामले को कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।दरअसल, परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनने से लेकर प्रिंटिंग तक की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता कंपनी के पास है।कंपनी प्राइवेट कर्मचारियों से यह काम करवाती है।अभी स्मार्ट चिप कंपनी के पास यह जिम्मेदारी है,जो शीघ्र ही सिल्वर टच, रोजमार्टा और फोकोम को मिल जाएगी। लखनऊ आरटीओ सहित प्रदेश भर के संभागीय परिवहन अधिकारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालयों में स्मार्ट चिप के 320 कर्मचारी काम करते हैं। हाल ही में संभागीय परिवहन अधिकारी लखनऊ संजय कुमार तिवारी ने परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों की दलालों से सांठगांठ होने की बात कही। साथ ही शिकायतें आने का हवाला देकर उन्हें हटाने की मांग की थी। इस पर परिवहन आयुक्त ने एक तरफा कार्रवाई करते हुए गत दिवस कर्मियों को अप्रत्यक्ष रूप से हटाने के निर्देश जारी कर दिए। उन्होंने सेवा प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिए किया कर्मचारियों को रखने से पूर्व उनका पुलिस सत्यापन करवाएं। उनका जनपद बदलें। संभागीय परिवर्तन अधिकारी व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी से सकारात्मक रिपोर्ट के उपरांत ही उन्हें दोबारा तैनाती दें।ऐसे निर्देश देकर कर्मचारियों की दोबारा तैनाती करीब नामुमकिन कर दी है। वहीं दूसरी ओर शनिवार को कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोपों को खारिज किया। साथ ही कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अधिकारी देने से बच रहे हैं। या यूं कहें कि उनके पास जवाब हैं ही नहीं। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह प्रकरण से जुड़े सवालों के जवाब देने से बच रही हैं।संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन संजय कुमार तिवारी ने दलालों से कर्मचारियों की सांठगांठ का आरोप लगाया है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक दशक से अधिक तैनात रहे ऐसे कर्मियों पर अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। क्यों अफसर चुप्पी साधे बैठे रहे।सेवा प्रदाता कंपनी स्मार्ट चिप ने इन 320 कर्मचारियों की भर्ती की थी, जिनकी दलालों से मिलीभगत बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्मार्ट चिप से इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई। अगर आरोप सच हैं तो क्यों स्मार्ट चिप को ब्लैकलिस्ट करने से अधिकारी बचते रहे। संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन संजय कुमार तिवारी ने दलालों से मिलीभगत की कर्मचारियों की शिकायतों का हवाला परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को दिया है। लेकिन यह शिकायतें कहां हैं, किसने और कब कीं,इसका जवाब संभागीय परिवहन अधिकारी के पास नहीं है।अगर शिकायतें हुई भी हैं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई। सूत्रों की माने तो ऐसी शिकायतें हुई ही नहीं हैं, इसलिए उन्हें परिवहन आयुक्त को नहीं भेजा गया है।परिवहन आयुक्त को भेजे गए पत्र में कर्मचारियों को भ्रष्ट कहा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक दशक तक तैनात ऐसे तथाकथित भ्रष्ट कर्मचारियों के साथ अधिकारी काम क्यों करते रहे। क्यों नहीं उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिकारी चुप्पी साधे रहे।शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाहरी दलाल कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे।ऐसे में सवाल उठता है कि कितने बाहरी दलाल पकड़े गए। कितनों के खिलाफ कार्रवाई हुई। सूत्र बताते हैं कि जिलाधिकारी की कार्यवाही के बाद जिन दलालों के वीडियो बने भी थे, उन पर कार्रवाई की जगह,मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आरटीओ आफिस के जानकार कहते हैं कि संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय लखनऊ पर एक कहावत सटीक बैठती है कि सब दढयल तो चूल्हा कौन फूकें। हालत यह है कि संभागीय परिवहन अधिकारी कार्यालय लखनऊ की सतत निगरानी कराई जाए तो सारथी भवन समेत सभी अनुभागों के काउंटरों पर प्राइवेट व्यक्ति सरकारी कर्मचारियों की भांति कार्य करते हुए मिल सकते हैं।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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