लखनऊ,(चौथाप्रहरी) 6दिसंबर।ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी (आईसीईएस 2025) की 7 वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ शनिवार को किया गया। संगोष्ठी का उद्धाटन करते हुए योगी सरकार के परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण से शहरों में चुनौतियां बढ़ गई हैं। इसलिए हमें पर्यावरण सुधारने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने होंगे।
परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह ने कहा कि पिछले 200 साल के दौरान हुई औद्योगिक क्रांति की वजह से पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, इसलिए हमें अभी से उपाय करने होंगे। मंत्री ने कहा कि डीजल बसों से पर्यावरण को काफी अधिक नुकसान होता है। इसलिए उन्होंने अपने विभाग इलेिक्ट्रक बसों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया। लखनऊ में पर्यावरण के स्तर में सुधार के पीछे इलेिक्ट्रक बसों की संख्या बढ़ना भी एक बड़ी वजह है।अभी तक 15 शहरों में ही इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होता था। अब इनकी संख्या बढ़कर 43 हो गई है। जल्द ही प्रदेश के सभी जनपदों में इन बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस मौके पर कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि पर्यावरण के मुद्दे पर पूरे विश्व में आम सहमति बनाना जरूरी है। कुलपति ने पूरी दुनिया से सेमिनार में शामिल होने आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया। लोकसेवा आयोग के सदस्य एके वर्मा ने कहा कि पर्यावरण जैसे मुद्दे हमें वैश्विक सोच रखनी होगी। रष्ट्रीय स्तर पर नीति बनानी होगी, स्थानीय स्तर पर काम करना होगा और व्यक्तिगत स्तर पर जागरुकता फैलानी होगी। ग्लोकल एनवायरनमेंट एंड एसोसिएशन के अध्यक्ष एमडी गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण मानवता के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है। कार्यक्रम के दौरान ग्लोकल एनवायरनमेंट एंड एसोसिएशन की ओर से संस्था के संस्थापक रामकुमार वर्मा की याद में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड की शुरुआत की गई। इस साल यह अवार्ड डॉ. क्षेत्रपाल गंगवार को दिया गया। समारोह के दौरान परिवहन मंत्री को अमेरिकन यूनिवर्सिटी की ओर से मानद उपाधि प्रदान की गई। सम्मेलन का आयोजन ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, सांस्कृतिक संपदा संरक्षण हेतु राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, अमेरिकी विश्वविद्यालय अमेरिका, ईसीआरडी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, हिसार (हरियाणा), वैश्विक पर्यावरण एवं सामाजिक संघ (जेसा) की ओर से किया गया।सम्मेलन का संयोजन डॉ. नलिनी मिश्रा एवं डॉ. राज कुमार सिंह ने किया।अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी, रैले के समुद्री, पृथ्वी और वायुमंडलीय विज्ञान विभाग के प्रो. विनय पी अनेजा ने कहा कि कृषि में इस्तेमाल होने वाली उर्वरक का सिर्फ 30 फीसदी हिस्सा ही पौधे को मिलता है। वहीं 70 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो जाता है। इसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।प्रो. अनेजा ने कहा कि रीएक्टिव नाइट्रोजन एक बड़ा मुद्दा बन रहा है। नाइट्रोजन ) पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 78 फीसदी पाया जाता है। उच्च तापमान और दबाव पर नाइट्रोजन गैस को हाइड्रोजन गैस के साथ उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिकृत करके अमोनिया बनाया जाता है। यही अमोनिया उर्वरक का आधार होती है। उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरक का काफी इस्तेमाल होता है। इसकी वजह से वातावरण से नाइट्रोजन भी कम हो रहा है।नाइट्रोजन की कमी पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और जनसंख्या की वजह से नाइट्रोजन का बेतहाशा दोहन किया जा रहा है। इसलिए हमें इस पर रोक लगानी होगी। ऐसा न करने पर पानी, ओजान ओर मिट्टी सभी के गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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