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लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में बवाल, डॉक्टरों-तीमारदारों में मारपीट, गेट का शीशा तोड़ा

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लखनऊ, 17 मार्च। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मरीज के तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
जानकारी के मुताबिक, एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को इलाज के लिए अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल रहा था, जिससे वे नाराज हो गए। उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से तीखी बहस शुरू कर दी।
वहीं अस्पताल प्रशासन और मेडिकल स्टाफ का कहना है कि मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही थी। लेकिन तीमारदारों ने जल्दबाजी और गुस्से में स्थिति को बिगाड़ दिया।

Lohia Hospital Lucknow emergency chaos broken glass police action
लोहिया अस्पताल में बवाल की तस्वीर

देखते ही देखते बहस ने उग्र रूप ले लिया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। इमरजेंसी वार्ड में मौजूद अन्य मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल बन गया। कई लोग अपनी सुरक्षा के लिए बाहर की ओर भागे, जबकि कुछ लोगों ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुस्साए तीमारदारों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। इस दौरान इमरजेंसी गेट का शीशा तोड़ दिया गया, जिससे कांच के टुकड़े चारों तरफ फैल गए। इस घटना से वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और किसी बड़े हादसे की आशंका भी पैदा हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने हंगामा कर रहे कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
यह मामला विभूति खंड थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। थाना प्रभारी ने स्पष्ट कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए गार्डों की संख्या बढ़ाने और इमरजेंसी वार्ड में प्रवेश को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अनावश्यक भीड़ को रोकने के लिए नई गाइडलाइंस लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। डॉक्टर और नर्स पहले ही भारी दबाव में काम करते हैं, ऐसे में इस तरह की हिंसा उनके मनोबल को तोड़ सकती है। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ता है और कई बार अन्य मरीजों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।
गौरतलब है कि देशभर में अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है, और क्या सरकार को इस दिशा में और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की असली वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। आने वाले समय में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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