लखनऊ,(विनय प्रकाश सिंह)14 अप्रैल।समाज में समानता, न्याय और मानव अधिकारों की अलख जगाने वाले भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती इस वर्ष पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। लेकिन इस बार यह दिन सिर्फ एक स्मरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
दरअसल, इसी दिन सामाजिक सेवा के लिए समर्पित संगठन “वानर सेना” का स्थापना दिवस भी मनाया जा रहा है। यह एक ऐसा संयोग है, जो अब प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है—जहां बाबा साहेब के विचार और जमीनी स्तर पर हो रही सेवा एक साथ नजर आती है।

बाबा साहेब ने जिस समाज का सपना देखा था, वह केवल कानून और संविधान तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें मानवीय संवेदनाएं, बराबरी और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी भी शामिल थी। आज “वानर सेना” उसी सोच को अपने कार्यों के जरिए साकार करती दिख रही है।
पिछले कई वर्षों से यह संगठन उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जो बीमारी, गरीबी या किसी अन्य संकट के कारण खुद को असहाय महसूस करते हैं। जब किसी परिवार के पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते, या कोई संकट अचानक दरवाजे पर खड़ा हो जाता है, तब “वानर सेना” आगे बढ़कर मदद का हाथ थामती है।
कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां इस संगठन की त्वरित मदद ने किसी की जान बचाई या किसी परिवार को टूटने से बचा लिया। यही कारण है कि आज यह संगठन सिर्फ एक समूह नहीं, बल्कि एक भरोसे का नाम बन चुका है।
“वानर सेना” की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता और निस्वार्थ सेवा भावना है। इसमें जुड़े लोग अलग-अलग वर्गों और पेशों से आते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है—जरूरतमंदों की मदद करना। कोई आर्थिक सहयोग देता है, तो कोई अपने समय और श्रम से योगदान करता है।
इस पूरे अभियान के केंद्र में संगठन के संरक्षक अजीत प्रताप सिंह हैं, जो न केवल दिशा देने का काम करते हैं, बल्कि हर जरूरतमंद तक मदद पहुंचाने में खुद भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनका स्पष्ट कहना है,
“मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, और यही हमारी असली पहचान होनी चाहिए।”
उनके नेतृत्व में “वानर सेना” ने सेवा को एक अभियान का रूप दे दिया है, जो अब तेजी से लोगों के बीच फैल रहा है।
डिजिटल युग में इस संगठन ने सोशल मीडिया को भी अपनी ताकत बना लिया है। किसी भी जरूरतमंद के लिए की गई अपील कुछ ही समय में सैकड़ों-हजारों लोगों तक पहुंच जाती है। इसके बाद मदद की एक श्रृंखला शुरू हो जाती है, जो यह साबित करती है कि अगर नीयत साफ हो, तो समाज खुद आगे आकर सहयोग करता है।
अंबेडकर जयंती के इस विशेष अवसर पर “वानर सेना” यह संदेश देती है कि समाज में बदलाव केवल विचारों से नहीं आता, बल्कि उन विचारों को जमीन पर उतारने से आता है।
आज जरूरत है कि हर व्यक्ति इस सोच को अपनाए और अपने स्तर पर किसी न किसी जरूरतमंद की मदद करने का संकल्प ले। यही बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही एक मजबूत, संवेदनशील और समान समाज की नींव भी रखेगा।
Author: Chautha Prahari
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