लखनऊ, 20 मई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश को एआई, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और खाद्य प्रसंस्करण का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बुधवार को अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आने वाले समय की अर्थव्यवस्था तकनीक और मजबूत डिजिटल नेटवर्क पर आधारित होगी, इसलिए यूपी को अभी से तैयार करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर परियोजना को प्रदेश के एआई मिशन की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एनसीआर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रदेश के दूसरे हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसकी शुरुआत Bundelkhand Industrial Development Authority यानी बीडा क्षेत्र से की जा सकती है, क्योंकि वहां बड़े स्तर पर जमीन उपलब्ध है।

बैठक में बताया गया कि यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाना है। इसके तहत एआई, क्लाउड सर्विस, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की योजना है। सरकार ने वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था और 1.5 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री ने बड़ी टेक कंपनियों के साथ संवाद बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम होना चाहिए। बैठक में यह भी बताया गया कि यूपी की भौगोलिक स्थिति, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट, बिजली व्यवस्था और बड़ी युवा आबादी इसे तकनीकी निवेश के लिए मजबूत राज्य बनाती है।
सरकार ने “प्रोजेक्ट गंगा” की भी समीक्षा की। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने के लिए तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी बनाया जाए, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और शुरुआत से ही प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और सभी कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रोजेक्ट गंगा के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर बनाया जाएगा। इससे करीब 50 हजार प्रत्यक्ष और एक लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार बनने की उम्मीद है। योजना के तहत 20 लाख से अधिक घरों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें महिला उद्यमियों को भी प्राथमिकता दी जाएगी और लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं को जोड़ने की योजना है।
सरकार का मानना है कि केवल मोबाइल इंटरनेट से सीमित सेवाएं मिलती हैं। जबकि टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, एआई आधारित खेती, ड्रोन मॉनिटरिंग और स्मार्ट विलेज जैसी सुविधाओं के लिए मजबूत ब्रॉडबैंड नेटवर्क जरूरी है। योजना के तहत प्रत्येक डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की तैयारी है। शुरुआत में इसे 21 जिलों में लागू किया जाएगा।
बैठक में गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि मंडियों को आधुनिक, साफ और आकर्षक बनाया जाए। उन्होंने साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, त्योहारों पर लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अल नीनो के संभावित असर का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में फसलों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रदेश के खाद्यान्न भंडार मजबूत और पर्याप्त होने चाहिए।
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में गेहूं दूसरे राज्यों में कच्चे रूप में चला जाता है। इससे रोजगार और राजस्व का फायदा बाहर चला जाता है। सरकार अब राज्य के भीतर ही गेहूं प्रसंस्करण बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए मंडी शुल्क और विकास उपकर में छूट देने का सुझाव भी रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये योजनाएं जमीन पर तेजी से लागू होती हैं तो यूपी आने वाले वर्षों में एआई, डिजिटल सेवाओं और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में देश का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे रोजगार, निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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