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बीएसए उपेंद्र गुप्ता के फैसले से शिक्षकों में बढ़ा भरोसा, प्रभारी प्रधानाध्यापक चयन प्रक्रिया पर फिर होगा विचार

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सुल्तानपुर 20मई(चौथा प्रहरी)। जनपद में प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाए जाने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) उपेंद्र गुप्ता ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षक संगठनों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए बीएसए ने पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है। विभाग की ओर से अब शिक्षकों की सहमति और असहमति के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले को शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सुल्तानपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक चयन प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों की बैठक का प्रतीकात्मक दृश्य
बीएसए कार्यालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार वरिष्ठता सूची में शामिल क्रमांक 1 से 1000 तक के शिक्षकों को 21 और 22 मई को बीआरसी दूबेपुर कार्यालय बुलाया गया है। यहां शिक्षक प्रभारी प्रधानाध्यापक बनने या न बनने को लेकर अपना सहमति अथवा असहमति पत्र देंगे। वरिष्ठता सूची में 1 से 500 तक के शिक्षक 21 मई को और 500 से 1000 तक के शिक्षक 22 मई को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक उपस्थित होंगे।
इस पूरी प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि शिक्षकों से विद्यालय और विकास क्षेत्र का विवरण नहीं मांगा जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे चयन प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहेगी और किसी प्रकार के पक्षपात की आशंका कम होगी। साथ ही वरिष्ठता सूची में अगर किसी तरह की गलती है तो शिक्षकों को मौके पर जरूरी साक्ष्य देने का अवसर भी मिलेगा।
शिक्षकों का कहना है कि बीएसए उपेंद्र गुप्ता लगातार संवाद और पारदर्शिता के साथ फैसले ले रहे हैं। यही वजह है कि विभाग में उनकी कार्यशैली को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। कई शिक्षक संगठनों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और इसे शिक्षक हित में लिया गया फैसला बताया है।
शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि इस फैसले का असर आगे की प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है। यदि सहमति और पारदर्शिता के आधार पर फैसले लिए जाते रहे तो विभाग में विवाद कम होंगे और शिक्षकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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