लखनऊ,29जून(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग 1 जुलाई से 15 जुलाई तक राज्यव्यापी ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ अभियान चलाएगा। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर शुरू होने वाले इस अभियान में बिना फिटनेस, बिना परमिट और सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले स्कूल वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन विभाग की प्रशासन और प्रवर्तन शाखा इस अभियान को संयुक्त रूप से संचालित करेगी। पहले चरण में स्कूल प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को नोटिस, फोन और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए चेतावनी दी जाएगी। उनसे कहा जाएगा कि 7 जुलाई तक सभी स्कूल वाहनों की फिटनेस कराकर उन्हें वैध परमिट से संचालित करें।
अभियान के दौरान परिवहन विभाग के अधिकारी अपने-अपने जिलों को जोन और सेक्टर में बांटकर हर स्कूल का दौरा करेंगे। वहां स्कूल वाहनों की वास्तविक स्थिति का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। वाहनों की फिटनेस, परमिट और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी।
परिवहन आयुक्त ने सभी उप परिवहन आयुक्त, संभागीय परिवहन अधिकारियों और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जुलाई के पहले सप्ताह में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति की बैठक कराई जाए। बैठक में बच्चों की सुरक्षित यात्रा से जुड़े सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
अभियान में अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा। उनसे अपील की जाएगी कि वे अपने बच्चों को जिस वाहन से स्कूल भेज रहे हैं, उसकी फिटनेस, परमिट और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जरूर लें।
7 जुलाई तक जागरूकता, नोटिस, बैठक और निरीक्षण का काम पूरा होने के बाद 8 जुलाई से 15 जुलाई तक पुलिस, यातायात पुलिस और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बिना परमिट, बिना फिटनेस या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूल वाहनों का चालान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे वाहनों को बंद भी किया जाएगा।
कार्रवाई केवल स्कूलों के अपने वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी। निजी वाहनों की भी जांच होगी जो नियमों का उल्लंघन करते हुए स्कूली बच्चों का परिवहन कर रहे हैं। ऐसे वाहनों को जब्त किया जाएगा और तब तक नहीं छोड़ा जाएगा, जब तक वे वैध परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर देते।
परिवहन आयुक्त ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों के वाहन लगातार बिना परमिट और बिना फिटनेस के चलते पाए जाएं, उनकी सूची जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग को भेजी जाए। यदि बार-बार चेतावनी के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित स्कूलों की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह अभियान प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ेगी, नियमों का पालन सख्ती से होगा और सड़क पर चलने वाले असुरक्षित स्कूल वाहनों की संख्या कम होने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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