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यूपी न्यूज: 2029 में साथ हो सकते हैं लोकसभा-विधानसभा चुनाव, संवैधानिक बदलाव की तैयारी तेज: जेपीसी अध्यक्ष

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लखनऊ में बोले पीपी चौधरी, समिति राज्यों से सुझाव जुटा रही है, अंतिम रिपोर्ट के बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी
लखनऊ,15 जुलाई(चौथा प्रहरी)।देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की कवायद अब तेज होती दिख रही है। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक दोनों चुनाव एक साथ कराने का है। इसके लिए संविधान और कानून में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समिति अभी विभिन्न पक्षों से सुझाव ले रही है और रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे का फैसला होगा।

लखनऊ में पत्रकारों को संबोधित करते संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी।
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत में चौधरी ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी कामकाज, विकास योजनाओं और प्रशासन पर असर पड़ता है। आदर्श आचार संहिता बार-बार लागू होने से कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। उनका कहना है कि एक साथ चुनाव होने पर समय, संसाधन और सरकारी खर्च तीनों में बचत होगी।
उन्होंने याद दिलाया कि आजादी के बाद 1952 से 1967 तक लोकसभा और अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते थे। बाद में समय से पहले विधानसभा भंग होने, राष्ट्रपति शासन और अन्य कारणों से यह चुनावी चक्र अलग-अलग हो गया।
जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय मतदाता अब पहले से अधिक जागरूक है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि एक साथ चुनाव होने पर मतदाता भ्रमित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले भी देश इस व्यवस्था का अनुभव कर चुका है।
पीपी चौधरी ने यह भी कहा कि एक साथ चुनाव का विचार नया नहीं है। चुनाव आयोग, विधि आयोग, संविधान समीक्षा आयोग, नीति आयोग और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति सहित कई संस्थाएं इस विषय पर सुझाव दे चुकी हैं। कोविंद समिति ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।
उन्होंने बताया कि इस विषय से जुड़े विधेयक संसद में पेश किए जा चुके हैं और अब संयुक्त संसदीय समिति उनके विभिन्न पहलुओं पर राय जुटा रही है। समिति अब तक करीब 10 राज्यों का दौरा कर चुकी है। मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, राजनीतिक दलों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश से भी कई अहम सुझाव मिले हैं।
ईवीएम और चुनावी तैयारी के सवाल पर चौधरी ने कहा कि यदि चुनाव आयोग को पर्याप्त समय मिले तो पूरे देश में एक साथ चुनाव कराना तकनीकी रूप से संभव है। उनका कहना था कि आधुनिक चुनाव प्रबंधन और तकनीक के कारण यह पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है।
आगे क्या?
जेपीसी अपनी रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपेगी। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो संवैधानिक संशोधन और संसद की मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। ऐसे में 2029 के आम चुनाव से पहले इस मुद्दे पर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

 

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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