लखनऊ,16जुलाई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में पौधरोपण अभियान को इस बार अलग स्वरूप दिया जा रहा है। 18 से 27 जुलाई के बीच प्रदेश भर में चार तरह के विशेष वन विकसित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, शहरों में मानव-वानर संघर्ष कम करना, ईंधन के लिए लकड़ी की जरूरत पूरी करना और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। यह सभी कार्यक्रम गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) से पहले पूरे किए जाएंगे।

अलग-अलग उद्देश्य के लिए तैयार होंगे चार वन
सबसे पहले 18 जुलाई को हर विकास खंड में समृद्धि वन बनाया जाएगा। इसका मकसद कृषि वानिकी को बढ़ावा देना है ताकि किसानों को खेती के साथ पेड़ों से भी अतिरिक्त आय मिल सके। कार्बन क्रेडिट जैसे नए विकल्पों पर भी जोर रहेगा। इसके लिए कृषि भूमि पर कम से कम एक हेक्टेयर क्षेत्र तय किया गया है और कृषि विभाग भी इसमें भागीदारी करेगा।
21 जुलाई को नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत क्षेत्रों में कपि वन लगाए जाएंगे। इनमें आम, जामुन, अमरूद, बेल, कटहल, पीपल, गुलर, शहतूत और अन्य फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इनका उद्देश्य शहरों से बाहर वानरों के लिए भोजन के प्राकृतिक स्रोत तैयार करना है, जिससे आबादी वाले इलाकों में उनका दबाव कम हो सके।
23 जुलाई को हर विकास खंड में ऊर्जा वन विकसित किया जाएगा। इसमें सिरस, बबूल, सुबबूल, पॉपलर, कदंब जैसी तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों का रोपण होगा। इसका लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में जलाऊ लकड़ी की जरूरत को पूरा करना और प्राकृतिक वनों पर दबाव कम करना है। इस अभियान में ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग भी सहयोग करेंगे।
27 जुलाई को प्रत्येक वन प्रभाग में समरस वन स्थापित होगा। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी के साथ सामूहिक पौधरोपण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समाज कल्याण विभाग भी इसमें शामिल रहेगा।
कई विभाग मिलकर चलाएंगे अभियान
वन विभाग ने इस अभियान में कृषि, ग्राम्य विकास, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग को भी जोड़ा है। हर वन का अलग उद्देश्य तय किया गया है ताकि पौधरोपण केवल संख्या तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा लाभ समाज और पर्यावरण दोनों को मिले।
आगे क्या असर होगा
यदि यह योजना जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है तो किसानों को आय के नए साधन मिल सकते हैं। शहरों में मानव-वानर संघर्ष कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी और सामाजिक भागीदारी के साथ बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र विकसित होंगे। इससे राज्य के पौधरोपण अभियान को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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