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मुफ्त राशन से पहले शिक्षा पर निवेश बढ़े,सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन. सिंह ने उठाए कई सवाल

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शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखतीं सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन. सिंह

नई दिल्ली,23जुलाई(चौथा प्रहरी)। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट और यूके की सॉलिसिटर रीना एन. सिंह ने देश की शिक्षा व्यवस्था, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर अपनी राय रखते हुए कहा कि भारत को अब गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में बढ़ती लागत, सीमित सरकारी सीटें और कथित शिक्षा माफिया जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन किसी भी हाल में हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता।

शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखतीं सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन. सिंह
एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट रीना एन सिंह की फोटो

विस्तार- एडवोकेट रीना एन. सिंह ने कहा कि देश के विकास की असली नींव अच्छी शिक्षा है। उनका मानना है कि हर वर्ग के छात्रों को बेहतर शिक्षा का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों की सीटें बढ़ाने की दिशा में अपेक्षित गति क्यों नहीं दिख रही है। उनका कहना है कि यदि सरकारी संस्थानों की क्षमता बढ़ेगी तो छात्रों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भारत को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो नई तकनीक के साथ आगे बढ़ सकें। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुसार मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा काफी नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों पर बराबर ध्यान देना होगा।
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए सत्ता पक्ष के साथ-साथ प्रभावी विपक्ष, जागरूक नागरिक और सक्रिय सामाजिक संगठनों की भी अहम भूमिका होती है। सभी पक्षों को राष्ट्रहित के मुद्दों पर मिलकर काम करना चाहिए।
रीना एन. सिंह ने मीडिया की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय, कॉलेज या शिक्षा से जुड़े मुद्दे पर छात्र आंदोलन कर रहे हैं तो समाचार माध्यमों को केवल घटनाएं नहीं, बल्कि छात्रों की मांगों और विवाद की पूरी पृष्ठभूमि भी लोगों तक पहुंचानी चाहिए। इससे समाज सही तथ्यों के आधार पर अपनी राय बना सकेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान कानून का पालन होना चाहिए। हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।
आगे क्या-शिक्षा की लागत, सरकारी संस्थानों में सीटों की संख्या, निजी शिक्षा संस्थानों की निगरानी और नई शिक्षा नीति के प्रभाव जैसे मुद्दों पर आने वाले समय में बहस और तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार, तकनीकी बदलाव और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों की मांग लगातार बढ़ रही है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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