लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री दयाशंकर सिंह ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर हॉल में आयोजित दो दिवसीय ‘सड़क सुरक्षा संवाद’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर जनभागीदारी की अहम भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सरकार कानून तो बना सकती है, लेकिन सड़क सुरक्षा केवल नियमों से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने व्यवहार में जिम्मेदारी लाए, तो सड़क हादसों में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

परिवहन मंत्री ने विशेष रूप से युवाओं और स्काउट-गाइड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्ष 2047 में जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब सड़क सुरक्षा और सामाजिक योगदान में स्काउट-गाइड का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को 50 प्रतिशत तक कम करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि हर वर्ष लगभग 23 से 24 हजार लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जो कि किसी भी महामारी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक देश के युवा इस अभियान से नहीं जुड़ेंगे, तब तक इस लक्ष्य को हासिल करना कठिन होगा।
उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे और प्रमुख सड़कों पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए जगह-जगह कैमरे लगाए गए हैं, ताकि ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके। हालांकि, कुछ लोग चालान से बचने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते हैं, जो कि चिंताजनक है।
मंत्री ने ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ जैसे नियमों का पालन करने की भी अपील की और स्पष्ट किया कि चालान का उद्देश्य जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को सड़क सुरक्षा नियमों के पालन का संकल्प दिलाया और इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
इस मौके पर परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदेश के सभी 75 जिलों से आए स्काउट-गाइड प्रशिक्षकों को सड़क सुरक्षा के आधारभूत नियमों, अवधारणाओं और दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक उपचार की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन प्रशिक्षकों के माध्यम से यह जानकारी स्कूल स्तर तक पहुंचाई जाएगी, जिससे बच्चों और युवाओं में प्रारंभिक स्तर से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
किंजल सिंह ने आगे बताया कि एक प्रायोगिक योजना के तहत एनसीसी और एनएसएस के युवाओं को भी सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये संगठन अनुशासन, सेवा और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम में भारत स्काउट एवं गाइड के स्टेट चीफ कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार, विशेष सचिव पीडब्ल्यूडी अमित कुमार, आईआरटीई के निदेशक डॉ. रोहित बालूजा सहित कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
यह ‘सड़क सुरक्षा संवाद’ कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों में स्काउट एवं गाइड इकाइयों को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ने और उन्हें संवेदनशील बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल माना जा रहा है।
Author: Chautha Prahari
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