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गाजियाबाद में राष्ट्रीय संगोष्ठी: समरस समाज निर्माण में गोरक्षपीठ की भूमिका पर गहन मंथन

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गाजियाबाद, 22 अप्रैल। जनपद में सामाजिक समरसता, समानता और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। हिंदी भवन, गजप्रस्थ में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय था—“सामाजिक समरसता में गोरक्षपीठ, गोरखपुर की भूमिका”। कार्यक्रम ने सामाजिक चेतना, वैचारिक संवाद और राष्ट्र निर्माण की दिशा में नई ऊर्जा का संचार किया।
संगोष्ठी में विभिन्न संतों, विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर समरसता के महत्व और उसके व्यावहारिक आयामों पर गहन चर्चा की।

गाजियाबाद में सामाजिक समरसता पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का दृश्य
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पूज्य अरुण योगी ने अपने संबोधन में कहा कि समरसता केवल एक सामाजिक अवधारणा नहीं, बल्कि जीवन जीने की ऐसी पद्धति है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को एक सूत्र में जोड़ती है। उन्होंने गोरक्षपीठ की परंपरा को जनकल्याण और सामाजिक एकता का सशक्त माध्यम बताते हुए इसे वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
जीवन दीप आश्रम से पधारे पूज्य स्वामी पद्मानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की मूल भावना समरसता में निहित है, जहां भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत को भारतीय संस्कृति का आधार बताते हुए गोरक्षपीठ के प्रयासों की सराहना की, जो समाज में समानता और सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश खांडेकर ने कहा कि गोरक्षपीठ ने हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर समरसता का संदेश दिया है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समरसता केवल धार्मिक या सामाजिक विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे सकारात्मक प्रयासों को व्यापक मंच मिलना चाहिए, जिससे समाज में जागरूकता और एकता को बल मिले।
इस संगोष्ठी का आयोजन ब्लॉसम इंडिया फाउंडेशन द्वारा किया गया, जो राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की प्रेरणा से संचालित श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पूर्व प्रयागराज, लखनऊ, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और अंबेडकर नगर में भी इसी विषय पर सफल संगोष्ठियाँ आयोजित की जा चुकी हैं। गाजियाबाद का आयोजन इस श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली कड़ी के रूप में सामने आया।
संगोष्ठी में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें गोरक्षपीठ का ऐतिहासिक योगदान, सामाजिक समरसता के लिए किए गए प्रयास, समावेशी नीतियों की आवश्यकता, तथा एक विकसित और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में समरसता की भूमिका शामिल रही।
कार्यक्रम के संयोजक एवं फाउंडेशन के संस्थापक शशिप्रकाश सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे विमर्शों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
यह संगोष्ठी सामाजिक समरसता के विचार को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में स्थापित हुई।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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