(अजय सिंह)
सुल्तानपुर,25मई(चौथा प्रहरी)। नगर पालिका में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर नया विवाद सामने आया है। एक महिला सभासद ने नगर पालिका के निर्माण लिपिक और अधिशासी अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए नगर विकास विभाग से शिकायत की थी। आरोप है कि शिकायत दिए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद भी मामले में कोई जांच शुरू नहीं हुई।

महिला सभासद ने निदेशक स्थानीय निकाय, नगर विकास मंत्री और प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग को भेजे गए शिकायती पत्र में कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का जिक्र किया था। अब कार्रवाई न होने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं कि क्या शिकायत को फाइलों में दबा दिया गया है।
सभासद का आरोप है कि नगर पालिका में एक निर्माण लिपिक पिछले करीब 20 वर्षों से उसी पटल पर तैनात हैं। इसे उन्होंने सरकारी स्थानांतरण नीति का उल्लंघन बताया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित लिपिक पर पहले गबन के आरोप सिद्ध हो चुके हैं और उन्हें कैश जमा करने से प्रतिबंधित किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्यों से जुड़ी फाइलों, निविदाओं और भुगतान सत्यापन में उनकी भूमिका बनी हुई है।
शिकायत में पुराने सड़क निर्माण घोटाले का भी जिक्र किया गया है। सभासद का कहना है कि उस मामले में अधिशासी अधिकारी और अभियंता पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन संबंधित लिपिक को संरक्षण दिया गया। आरोप है कि 40 लाख रुपये की निविदा को बढ़ाकर 67 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कराया गया, जिससे सरकारी धन की क्षति हुई।
नगरोदय योजना के तहत बनने वाले फूड स्ट्रीट हब प्लाजा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सभासद ने आरोप लगाया कि मूल योजना को किनारे रखकर पालिका निधि और राज्य वित्त से नियमों के विपरीत कैंटीन का निर्माण कराया गया।
पर्यावरण पार्क में बनी कैंटीन के किराये को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, कैंटीन का किराया नियमित रूप से जमा नहीं किया जा रहा है। सभासद ने आरोप लगाया कि इस रकम में गड़बड़ी की जा रही है।
महिला सभासद ने यह भी कहा कि निर्माण लिपिक की प्रोन्नति में अनियमितता की पुष्टि पहले हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले का स्वतः संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है।
इस मामले में अधिशासी अधिकारी लालचंद सरोज से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
अब यह मामला नगर पालिका की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि जल्द जांच नहीं हुई तो विपक्ष और स्थानीय लोगों का दबाव बढ़ सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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