लखनऊ, 15 जून( चौथा प्रहरी)। लखनऊ में आयोजित तीन दिवसीय डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ का सोमवार को समापन हो गया। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल, महिला और युवा सशक्तिकरण, डिजिटल क्रांति तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आगे की प्रगति काफी हद तक महिलाओं और युवाओं की क्षमता को सही दिशा देने पर निर्भर करेगी।

कार्यक्रम के पहले सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और डिजिटल बदलाव की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय डिजिटल क्रांति का है और लोगों को नई तकनीकों को सीखने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नई नीतियों पर जनता की राय लेने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी उपयोग कर रही है।
वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवडेकर ने कहा कि किसी भी राज्य और देश के विकास में महिलाओं और युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में मीडिया समेत कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। उनके अनुसार शासन और प्रशासन अब महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हुआ है, जिससे महिलाएं अपनी बात बेहतर तरीके से रख पा रही हैं।
नागालैंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने डिजिटल मीडिया को देश को जोड़ने वाला बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने राज्यों के बीच की दूरियां कम कर दी हैं। उन्होंने कहा कि नागालैंड-म्यांमार सीमा के अंतिम गांवों तक भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहचान पहुंच चुकी है। उनके मुताबिक यह डिजिटल क्रांति और कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका का परिणाम है। उन्होंने सकारात्मक और जिम्मेदार कंटेंट निर्माण की भी अपील की।
पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि महिलाओं को पहले की तुलना में अधिक अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रिएटर्स के पास लाखों लोगों तक सूचना पहुंचाने की क्षमता है और नवाचार तथा उद्यमिता देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर चर्चा हुई। इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमिश्नर गौरांग दास ने कहा कि भगवद्गीता जीवन को समझने और सही दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। उन्होंने सोशल मीडिया क्रिएटर्स से भारतीय संस्कृति और भगवान राम के संदेश को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता शेफाली वैद्य ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक राम मंदिर निर्माण की कल्पना भी कठिन लगती थी, लेकिन देश में कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को स्थानीय मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों पर आधारित सामग्री तैयार करने की सलाह दी ताकि लोगों को अपने इतिहास और परंपराओं की जानकारी मिल सके।
वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना के प्रसार की गति को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब ज्ञानवापी और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि जैसे मामलों से जुड़ी जानकारी तेजी से लोगों तक पहुंच रही है। साथ ही उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स से जिम्मेदारी के साथ काम करने और तथ्यों पर आधारित जानकारी साझा करने की अपील की।
समापन समारोह में वक्ताओं का साझा मत रहा कि डिजिटल तकनीक, महिला और युवा शक्ति तथा सांस्कृतिक जागरूकता मिलकर उत्तर प्रदेश और देश के विकास को नई दिशा दे सकते हैं। आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म जनभागीदारी बढ़ाने, सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और विकास से जुड़े संदेशों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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