लखनऊ,16जून( चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में एजेंसी के जरिए भर्ती किए गए कर्मचारियों ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए करीब एक दर्जन कर्मचारियों ने परिवहन आयुक्त कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए गए, लेकिन कुछ ही महीनों में उन्हें काम से हटा दिया गया। पीड़ितों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कर्मचारियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी तीन कंपनियां पीएचकाम नेट,रोजमार्टा और सिल्वर टच ने प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब तीन-तीन लाख रुपये वसूले। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नौकरी मिलने के बाद उन्हें केवल एक से दो महीने तक ही काम करने दिया गया। इसके बाद बिना कोई स्पष्ट कारण बताए सेवा से हटा दिया गया।
पीड़ित कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियां कर्मचारियों के खातों में वेतन तो भेजती थीं, लेकिन बाद में किसी न किसी बहाने वह रकम वापस ले ली जाती थी। कुछ लोगों का दावा है कि उनसे दबाव बनाकर पैसे वापस लिए गए, जबकि कुछ कर्मचारियों से ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर कराए गए।
मंगलवार को शिकायत लेकर पहुंचे कर्मचारियों ने परिवहन आयुक्त से मिलने की कोशिश की। उनका कहना है कि वे कई घंटों तक कार्यालय में इंतजार करते रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी है, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं को आर्थिक नुकसान हुआ है। उनका आरोप है कि नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये लिए गए और बाद में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पीड़ितों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल युवाओं के साथ अन्याय हैं, बल्कि इससे सरकार और विभाग की छवि भी प्रभावित होती है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल कंपनियों और यदि किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
इस मामले में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। हालांकि उनके कार्यालय की ओर से मीटिंग और प्रेजेंटेशन में व्यस्त होने का हवाला देते हुए मुलाकात नहीं कराई गई। फिलहाल शिकायतों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। इससे भविष्य में सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवालों के जवाब तलाशने का अवसर मिलेगा।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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