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UP NEWS: यूपी में शुरू होगा ‘कैच-अप शिक्षण अभियान’, पढ़ाई में पीछे रह गए बच्चों को मिलेगा विशेष सहयोग

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कक्षा में विद्यार्थियों को पढ़ाते शिक्षक और कैच-अप शिक्षण गतिविधि में शामिल बच्चे का सांकेतिक दृश्य 

लखनऊ,16 जून( चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाई में पीछे रह गए बच्चों के लिए बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जुलाई 2026 से प्रदेशव्यापी ‘कैच-अप शिक्षण अभियान’ चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों के लर्निंग गैप को खत्म करना और उन्हें उनकी कक्षा के अपेक्षित स्तर तक पहुंचाना है।
इस योजना के तहत जुलाई में सभी विद्यार्थियों के लिए 15 दिन का पुनरावृत्ति शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक स्कूलों में रोजाना 20 से 30 मिनट का विशेष कैच-अप शिक्षण सत्र चलेगा। सरकार का कहना है कि हर बच्चे को उसकी जरूरत के अनुसार शैक्षणिक सहयोग दिया जाएगा ताकि कोई भी विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया में पीछे न रह जाए।

कक्षा में विद्यार्थियों को पढ़ाते शिक्षक और कैच-अप शिक्षण गतिविधि में शामिल बच्चे का सांकेतिक दृश्य 
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफएसई-2023 के अनुरूप तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि समय पर सीखने की कमियों को दूर नहीं किया गया तो आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से विद्यालय स्तर पर एक व्यवस्थित और परिणाम आधारित योजना लागू की जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने निपुण भारत मिशन के माध्यम से आधारभूत साक्षरता और गणितीय दक्षता को मजबूत करने पर जोर दिया है। अब शिक्षा सुधार का फोकस केवल नामांकन और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के वास्तविक सीखने के स्तर पर भी दिया जा रहा है। कैच-अप शिक्षण अभियान इसी दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अभियान के दौरान पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। शिक्षण को बच्चों के दैनिक जीवन, स्थानीय परिवेश और अनुभवों से जोड़ा जाएगा। शिक्षण-अधिगम सामग्री, गणित किट, पुस्तकालय की किताबें, चार्ट, पोस्टर और अन्य स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही खेल, कहानी, चित्र, लेखन और समूह गतिविधियों के जरिए बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाने का प्रयास होगा।
कार्यक्रम में बच्चों की सीखने से जुड़ी कठिनाइयों की पहचान भी की जाएगी। इसके लिए त्रुटि विश्लेषण की व्यवस्था होगी, जिससे यह समझा जा सके कि विद्यार्थी किस विषय या कौशल में पीछे हैं। इसके आधार पर उन्हें अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। पीयर लर्निंग, पेयर लर्निंग और सहयोगात्मक शिक्षण जैसी पद्धतियों का इस्तेमाल कर बच्चों में आत्मविश्वास और सहभागिता बढ़ाई जाएगी।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विद्यार्थियों का बेसलाइन और एंडलाइन आकलन किया जाएगा। उनकी प्रगति का रिकॉर्ड रखा जाएगा और समय-समय पर समीक्षा भी होगी। एआरपी, एसआरजी, डायट मेंटर और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यक्रम की निगरानी करेंगे। साथ ही विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि बच्चों को घर और स्कूल दोनों जगह सीखने का बेहतर माहौल मिल सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह प्रदेश में अधिगम स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और गुणवत्तापूर्ण तथा समावेशी शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
भविष्य पर प्रभाव-कैच-अप शिक्षण अभियान से उन लाखों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है जो किसी कारणवश पढ़ाई में पीछे रह गए हैं। नियमित आकलन, व्यक्तिगत सहयोग और गतिविधि आधारित शिक्षण के जरिए बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार होगा। इससे स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और प्रदेश में बेहतर शैक्षणिक परिणाम हासिल करने का रास्ता मजबूत होगा।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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