लखनऊ, 24जुलाई(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश में अपराध जांच को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में छह सप्ताह का क्राइम सीन मैनेजमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हो गया। इस बैच में प्रदेश के अलग-अलग कमिश्नरेट और जिलों से आए 94 पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मकसद यह है कि जांच के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों का सही तरीके से संरक्षण हो और अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए जा सकें।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को केवल अपराध स्थल की सुरक्षा और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया ही नहीं सिखाई गई, बल्कि साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और आधुनिक जांच तकनीकों का भी व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इससे पुलिस अधिकारी नई तरह के अपराधों की जांच अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।
समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे पूर्व पुलिस महानिदेशक और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि मजबूत जांच ही न्याय की मजबूत नींव होती है। उन्होंने बताया कि डीएनए, फिंगरप्रिंट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अपराधियों तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि घटनास्थल से साक्ष्य सही तरीके से जुटाए जाएं तो अदालत में उनका महत्व और बढ़ जाता है।
उन्होंने प्रशिक्षित अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करने की अपील की, ताकि वैज्ञानिक जांच की यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में मजबूत हो सके।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि आधुनिक दौर में कानून और विज्ञान साथ मिलकर बेहतर न्याय व्यवस्था तैयार करते हैं। वहीं अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण में थ्योरी के साथ-साथ कई व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए, जिससे अधिकारी वास्तविक घटनास्थल पर बेहतर तरीके से काम कर सकें।
क्या बदलेगा आगे?
फॉरेंसिक आधारित जांच पर बढ़ता जोर आने वाले समय में पुलिस विवेचना की गुणवत्ता सुधार सकता है। इससे डिजिटल अपराध, हत्या, लूट और अन्य गंभीर मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों का बेहतर इस्तेमाल होगा। मजबूत जांच से अदालत में मामलों की सुनवाई अधिक प्रभावी होने और दोषसिद्धि दर बढ़ने की संभावना भी बढ़ेगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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