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वन विभाग के पौधारोपण दावों पर सवाल, कागजों में लाखों पौधे–जमीन पर नहीं दिखी हरियाली

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वन विभाग में पौधों को लगाने में खेल!

लखनऊ से विशेष रिपोर्ट-चौथा प्रहरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे पौधारोपण अभियानों को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय आंकड़ों में हर साल लाखों पौधे लगाने का दावा किया जाता है, लेकिन कई स्थानों पर जमीनी स्तर पर इन पौधों का कोई स्पष्ट प्रमाण दिखाई नहीं दे रहा है।

वन विभाग में पौधों को लगाने में खेल!
सांकेतिक चित्र

स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि जिन क्षेत्रों को विभागीय रिकॉर्ड में “रोपित क्षेत्र” बताया गया है, वहां वास्तविकता में पौधारोपण का असर नजर नहीं आता। कई जगहों पर लगाए गए पौधों की देखभाल न होने के कारण वे सूख गए या फिर वहां पौधे लगाए ही नहीं गए।
कागजों में खर्च, जमीन पर सवाल
हर वर्ष वन विभाग द्वारा पौधारोपण अभियान के तहत गड्ढे खोदने, पौधे खरीदने और उनकी सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च किया जाता है। लेकिन आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कई स्थानों पर केवल औपचारिकता निभाने के लिए पौधे लगाए जाने की तस्वीरें खींच ली जाती हैं, जबकि बाद में उनकी देखभाल नहीं की जाती।
यदि इन योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जांच होने पर कई स्थानों पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण पर उठ रहे सवाल
प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान भी चलाए गए। इन अभियानों का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करना था। हालांकि, कई क्षेत्रों में अभी भी हरियाली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।
इसके अलावा कुछ जगहों पर पेड़ों की कटाई की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नही।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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