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अयोध्या में स्वच्छता की नई पहल: अब कूड़ा गाड़ियों में बजेगा अवधी जिंगल, घर-घर पहुंचेगा संदेश

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अयोध्या में कूड़ा गाड़ी से बजता अवधी जिंगल स्वच्छता संदेश देते हुए

अयोध्या,14अप्रैल । रामनगरी अयोध्या में स्वच्छता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए एक अनूठी और सांस्कृतिक पहल की शुरुआत की गई है। अब नगर निगम के कूड़ा संग्रहण वाहनों में अवधी भाषा में तैयार किए गए जिंगल बजाए जाएंगे, जो शहरवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगे। इस पहल को नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार की सहमति मिल चुकी है, जिससे इसे जल्द ही पूरे शहर में लागू किया जाएगा।

अयोध्या में कूड़ा गाड़ी से बजता अवधी जिंगल स्वच्छता संदेश देते हुए
इस अभिनव पहल की शुरुआत चिंतन इन्वायरमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप ने की है। संस्था के सक्रिय सदस्य आलोक सिंह राणा के नेतृत्व में तैयार इस अवधी जिंगल का उद्देश्य लोगों को सूखा और गीला कचरा अलग करने के लिए प्रेरित करना है। फिलहाल नगर निगम के चार वार्डों में इस जिंगल का सफल संचालन शुरू हो चुका है और स्थानीय लोगों के बीच इसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
विशेष बात यह है कि यह जिंगल पूरी तरह स्थानीय भाषा अवधी में तैयार किया गया है, जिससे आमजन आसानी से इसे समझ पा रहे हैं और इससे जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय को लोकभाषा के माध्यम से प्रस्तुत करना इस पहल को और अधिक प्रभावी बना रहा है।
इस जिंगल के बोल महापौर गिरीशपति त्रिपाठी के मार्गदर्शन में तैयार किए गए हैं। वहीं सामाजिक संस्था “राम का घर” के प्रबंधक एवं चिंतन संस्था के चीफ कोऑर्डिनेटर ने इसकी रचना की है। इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि “स्वच्छ अयोध्या” अभियान को नई गति मिलेगी और शहर को साफ-सुथरा बनाने में जनभागीदारी बढ़ेगी।
इस पहल के सूत्रधार आलोक सिंह राणा एक शिक्षाविद और समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं। वे हर महीने 15 दिन दिल्ली में रहकर आईएएस परीक्षार्थियों को इतिहास विषय का मार्गदर्शन देते हैं, जबकि शेष समय अयोध्या में सामाजिक कार्यों में लगाते हैं। उनका उद्देश्य अयोध्या को प्रभु श्रीराम के अनुरूप दिव्य और भव्य स्वरूप में विकसित करना है।
आलोक सिंह राणा का सामाजिक कार्यों में योगदान भी उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 2012 में उन्होंने अयोध्या में करीब 15 हजार लोगों के साथ सामूहिक राष्ट्रगान का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। इसके अलावा उन्होंने “थूकू अंकल” अभियान चलाकर लगभग 20 हजार बच्चों को सार्वजनिक स्थलों पर थूकने के खिलाफ जागरूक किया। वर्ष 2022 में उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सेना के सम्मान में राष्ट्रगान अभियान आयोजित किया, जबकि 2025 में ऑनलाइन हनुमान चालीसा पाठ में करीब 45 लाख लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कराई।
नगर निगम की यह नई पहल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय भाषा और संस्कृति को भी बढ़ावा देने का माध्यम बन रही है। जब कूड़ा संग्रहण वाहन मोहल्लों में अवधी जिंगल के साथ पहुंचेंगे, तो लोग न केवल जागरूक होंगे, बल्कि स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लोकभाषा आधारित पहलें जनभागीदारी बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होती हैं। अयोध्या में शुरू हुई यह पहल अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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