लखनऊ, 08मई(चौथा प्रहरी। उत्तर प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्र अब सिर्फ पोषाहार बांटने तक सीमित नहीं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के बाद ये केंद्र गांव-गांव में गर्भवती महिलाओं, बच्चों और धात्री माताओं के स्वास्थ्य की मजबूत कड़ी बनते जा रहे हैं। प्रदेश के 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से इस समय 2.12 करोड़ बच्चे, गर्भवती और धात्री महिलाएं लाभ ले रही हैं।

सरकार का दावा है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े अभियानों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में पांच प्रतिशत से ज्यादा कमी दर्ज की गई है। वहीं संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 84 फीसदी के पार पहुंच गया है, जिसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
तकनीक से बदली आंगनवाड़ी व्यवस्था
प्रदेश सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों को तकनीक से जोड़कर पोषाहार वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया है। अब कई केंद्रों पर बायोमीट्रिक प्रणाली के जरिए अनुपूरक पुष्टाहार का वितरण किया जा रहा है। इससे लाभार्थियों की सही पहचान और निगरानी आसान हुई है।
कुपोषण की सही पहचान के लिए सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को ग्रोथ मॉनीटरिंग डिवाइस और मोबाइल फोन दिए गए हैं। पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और एएनएम को प्रशिक्षण भी दिया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पोषण ट्रैकर के संचालन में 98 प्रतिशत कार्यकुशलता दर्ज की गई है। प्रदेश में 23 हजार से ज्यादा सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र आधुनिक सुविधाओं के साथ चल रहे हैं। साथ ही 266 नए केंद्रों को मंजूरी भी दी गई है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में आई कमी
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत अब तक 60 लाख से अधिक माताएं लाभान्वित हो चुकी हैं। वहीं जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।
इन योजनाओं का असर मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी के रूप में सामने आया है। प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने करीब साढ़े छह हजार आंगनवाड़ी केंद्र गोद लिए हैं। इससे इन केंद्रों की निगरानी और सुविधाओं में सुधार हुआ है।
“संभव अभियान” से कुपोषण पर फोकस
बच्चों में कुपोषण रोकने के लिए चलाए जा रहे “संभव अभियान” के तहत प्रदेशभर में 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें 2.5 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों का पंजीकरण कर उन्हें विशेष पोषण सेवाओं से जोड़ा गया है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर आने वाले 3 से 6 वर्ष तक के 35 लाख से ज्यादा बच्चों को रोजाना हॉट कुक्ड मील दिया जा रहा है। इसके लिए 60 हजार महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है। इससे महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का भी मौका मिल रहा है।
भविष्य पर असर
सरकार का मानना है कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे ही मजबूत समाज की नींव हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों को तकनीक, पोषण और निगरानी से जोड़ने का असर आने वाले समय में और बड़ा दिखाई दे सकता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने से कुपोषण और मातृ मृत्यु दर में और कमी आने की उम्मीद है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854






