लखनऊ,12 मई(चौथा प्रहरी)। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ अब सौर ऊर्जा पर भी बड़ा फोकस कर रही है। प्रदेश के 67 हजार से ज्यादा गांवों में 33 हजार से अधिक जलापूर्ति परियोजनाएं सौर ऊर्जा से चलाई जा रही हैं। इससे न सिर्फ बिजली की बड़ी बचत हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से अब तक करीब 900 मेगावाट बिजली की बचत हुई है और 2 करोड़ से ज्यादा परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक राजशेखर ने बताया कि सरकार ने जल जीवन मिशन की योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ने का फैसला इसलिए किया ताकि गांवों में पानी की सप्लाई लगातार बनी रहे। पहले कई योजनाएं बिजली कटौती या बिजली बिल भुगतान की समस्या के कारण बंद हो जाती थीं। अब सौर ऊर्जा आधारित सिस्टम लगने से यह दिक्कत काफी हद तक खत्म हो गई है।
उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं को 30 साल तक काम करने के हिसाब से तैयार किया गया है। अनुमान है कि सामान्य बिजली व्यवस्था के मुकाबले अगले 30 वर्षों में प्रदेश सरकार के करीब 37 हजार करोड़ रुपये बचेंगे। इसके साथ ही सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपिंग सिस्टम बिजली पर निर्भरता भी कम कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इस मॉडल से पर्यावरण को भी बड़ा फायदा होगा। 33 हजार से ज्यादा परियोजनाओं में ग्रिड बिजली की जगह सौर ऊर्जा इस्तेमाल होने से हर साल करीब 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। यह भारत के वर्ष 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगा।
उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन को सौर ऊर्जा से जोड़ने के इस प्रयोग की केंद्र सरकार ने भी सराहना की है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव Anurag Srivastava को इस पहल के लिए सम्मानित किया था।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसी तरह सौर ऊर्जा आधारित जल योजनाओं का विस्तार होता रहा, तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण इलाकों में पानी की सप्लाई और ज्यादा मजबूत होगी। साथ ही बिजली खर्च कम होने से सरकारी संसाधनों की भी बड़ी बचत होगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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