लखनऊ,19मई( चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को देश और दुनिया के बड़े बाजार तक पहुंचाने की तैयारी में है। “एक जनपद एक व्यंजन” योजना के तहत हर जिले के खास पारंपरिक खाने की पहचान कर उसका ब्रांड तैयार किया जाएगा। हाल ही में योगी कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दी है। सरकार का लक्ष्य स्वाद और परंपरा को बचाने के साथ रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देना भी है।

योजना के तहत जिलों के मशहूर व्यंजनों की सूची तैयार की गई है। इसके लिए जिलाधिकारियों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और जिला उद्योग केंद्रों से सुझाव लिए गए। अब इन व्यंजनों को आधुनिक मानकों के हिसाब से तैयार किया जाएगा ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकें।
सरकार ने पारंपरिक व्यंजनों की गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए बड़े संस्थानों की मदद लेने का फैसला किया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) के सहयोग से “स्टैंडर्ड रेसिपी मैन्युअल” तैयार किए जाएंगे। इससे हर जगह स्वाद और गुणवत्ता एक जैसी बनी रहेगी। साथ ही व्यंजनों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और नए वैरिएंट तैयार करने पर भी काम होगा।
योजना में आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर खास जोर दिया गया है। भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) की मदद से स्मार्ट पैकेजिंग, इको-फ्रेंडली पैक, क्यूआर कोड, बारकोड और न्यूट्रीशन लेबलिंग जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इससे ग्राहकों को उत्पाद की पूरी जानकारी मिलेगी और बाजार में भरोसा बढ़ेगा।
स्थानीय उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। उन्हें पैकेजिंग, डिजाइनिंग, फूड प्रोसेसिंग और गुणवत्ता सुधार का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे गांव और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
सरकार “स्वाद यूपी का” थीम के तहत प्रदेश के बड़े आयोजनों में पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी भी लगाएगी। इसके अलावा डिजिटल प्रचार और ब्रांडिंग अभियानों के जरिए यूपी के पारंपरिक स्वाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी है।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में “एक जनपद एक व्यंजन” योजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगी। साथ ही स्थानीय कारोबार, पर्यटन और निर्यात को भी नई रफ्तार मिल सकती है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854





