15 Best News Portal Development Company In India

भीषण गर्मी में बिजली संकट नहीं होगा, गांव-नगर में निर्बाध सप्लाई के निर्देश

SHARE:

लखनऊ, 24मई(चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ में रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा विभाग की बड़ी समीक्षा बैठक में साफ कहा कि भीषण गर्मी के दौरान गांव हो या शहर, कहीं भी बिजली संकट नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम लोगों, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जाए। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत भी मौजूद रहे।

सीएम योगी ने विद्युत विभाग का रविवार को किया समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सभी बिजली उत्पादन इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाया जाए और तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए। समीक्षा में बताया गया कि प्रदेश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता अब बढ़कर 13,388 मेगावाट पहुंच गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय बिजली घर शामिल हैं। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी करीब 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।
सरकार ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में इस समय 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें संचालित हैं और 715 उपकेंद्रों के जरिए बिजली आपूर्ति की जा रही है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने फीडर स्तर पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बंद होने या शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आंधी-तूफान और तेज गर्मी के दौरान भी बिजली व्यवस्था जल्दी बहाल करने के लिए त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने को कहा गया है। बैठक में बताया गया कि मई में आए आंधी-तूफान से 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे, लेकिन तेजी से मरम्मत कर सप्लाई बहाल कर दी गई।
बैठक में यह भी सामने आया कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं में बड़ी कमी आई है। वर्ष 2022-23 में जहां 429 पावर ट्रांसफॉर्मर खराब हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 87 रह गई। बड़े वितरण ट्रांसफॉर्मरों की क्षति दर में भी कमी दर्ज की गई है।
गर्मी बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। 15 अप्रैल से 22 मई के बीच औसत डिमांड 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन हो गई। वहीं पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक पहुंच गई। अधिकारियों ने बताया कि 20 से 22 मई के बीच उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।
मुख्यमंत्री ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा योजना पर भी जोर दिया। वर्ष 2029 तक अतिरिक्त 10,719 मेगावाट क्षमता जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसमें विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और हाइब्रिड परियोजनाएं शामिल हैं।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने अहम फैसले लिए हैं। प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। सरकार ने सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को फिर से पोस्टपेड व्यवस्था में बदल दिया है। जून 2026 से उपभोक्ताओं को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच बिल जारी किए जाएंगे। बिल एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के जरिए भी भेजे जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। नई 1912 कॉल सेंटर प्रणाली के तहत अब रोजाना 90 हजार कॉल संभालने की क्षमता विकसित की गई है। उन्होंने मंत्रियों को कॉल सेंटर का निरीक्षण करने और व्यवस्था की जांच करने को कहा। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिजली कटौती होने पर उपभोक्ताओं को यह जरूर बताया जाए कि सप्लाई कब तक बहाल होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि किसानों की सिंचाई, व्यापार और उद्योग से जुड़ा बड़ा विषय है। उन्होंने साफ कहा कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार की प्राथमिकता है कि गर्मी के पूरे मौसम में प्रदेशवासियों को भरोसेमंद बिजली मिलती रहे।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

Registration NO. UDYAM -UP-24-0043854