लखनऊ,25मई(चौथा प्रहरी)। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खरीफ-2026 की तैयारियों की समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए। सरकार ने खरीफ-2026 के लिए 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और फसल विविधीकरण पर खास ध्यान दिया जाए ताकि किसानों की आय बढ़ सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएं। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तर्ज पर कृषि क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी आयोजित करने के भी निर्देश दिए।
सरकार ने खरीफ-2026 के लिए 110.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती और 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन तय किया गया है। वहीं बाजरा, मक्का, अरहर और मूंगफली के उत्पादन में भी बढ़ोतरी की योजना बनाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ-2026 के लिए 2.29 लाख क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 24 मई तक 1.26 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों तक खेती से जुड़ी जानकारी हर माध्यम से पहुंचनी चाहिए। उन्होंने टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया, दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए कृषि सलाह देने के निर्देश दिए। साथ ही कम अवधि और सूखा सहन करने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
सरकार जून महीने से सभी विकास खंडों में साप्ताहिक चौपाल शुरू करेगी। इन चौपालों के साथ किसान मेले भी लगाए जाएंगे ताकि किसानों को नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री ने कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, मंडियों और वेयरहाउस के आसपास साफ-सफाई और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 18 से 20 जिले सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं। ऐसे में धान और मूंगफली की खेती प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न के अतिरिक्त बीजों की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क परियोजना को तेजी से शुरू करने के निर्देश दिए।
उर्वरकों की उपलब्धता की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 36.44 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहे हैं। प्रवर्तन अभियान के तहत 4025 छापे डाले गए, 81 लाइसेंस निलंबित किए गए और 9 एफआईआर दर्ज हुईं।
डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सरकार का जोर दिखा। बैठक में बताया गया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत अब तक 2.29 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए भी पंजीकरण कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड समेत जल संकट वाले इलाकों में प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में रसायन मुक्त खेती की गई और 21,934 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।
बैठक में मक्का उत्पादन बढ़ाने और उससे जुड़े उद्योगों के साथ समन्वय मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। सरकार ने वर्ष 2027-28 तक 32.84 लाख मीट्रिक टन मक्का उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र किसानों को समय से लाभ मिलना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक पीएम किसान योजना के तहत अब तक प्रदेश के किसानों को 99,032 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी जा चुकी है। वहीं फसल बीमा योजना के तहत 80.61 लाख किसानों को 6454.57 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति मिली है।
सरकार की इस तैयारी से साफ है कि आने वाले समय में खेती को तकनीक और बाजार से जोड़ने पर ज्यादा जोर रहेगा। अगर योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू होती हैं तो किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ बेहतर आय का भी फायदा मिल सकता है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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