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लखनऊ न्यूज:वैश्विक बाजार पर रहा फोकस,मैंगो वायर सेलर मीट किसने और निर्यातकों के बीच हुए अनुबंध!जाने क्या नहीं मुख्य विशेषता   

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लखनऊ,04 जुलाई (चौथा प्रहरी)। राजधानी लखनऊ में शनिवार को आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026 के दूसरे दिन आम उत्पादकों और निर्यातकों को एक मंच पर लाने की कोशिश दिखाई दी। जन भवन में हुई मैंगो बायर-सेलर मीट में कई उत्पादकों और निर्यातकों के बीच समझौता हुआ। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह उपस्थित रहे। इस पहल का मकसद किसानों को सीधे बड़े खरीदारों से जोड़ना और उत्तर प्रदेश के आम को देश के साथ-साथ विदेशों के बाजार तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में आम के वैश्विक बाजार पर सभी का जोर रहा। नये किस्म के आम उत्पादन का मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश बन चुका है। जिसके कारण देश-विदेश में भी यूपी के आमों की चर्चा है।

लखनऊ के जन भवन में आयोजित मैंगो बायर-सेलर मीट में आम उत्पादक और निर्यातक
Photo credit Suchna jansampark

बैठक में किसानों, निर्यातकों, एफपीओ और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों ने भाग लिया। चर्चा इस बात पर रही कि किसानों को बेहतर कीमत कैसे मिले और बिचौलियों पर निर्भरता कैसे कम हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान सीधे खरीदारों से जुड़ेंगे तो उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पहली बार आम महोत्सव जन भवन परिसर में आयोजित किया गया है। उनके अनुसार इससे किसानों को सम्मान के साथ अपनी उपज और उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। उन्होंने प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए निवेशकों से आगे आने की अपील भी की। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसी इकाइयों के लिए निर्धारित योजनाओं के तहत सब्सिडी उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में होने वाले कुल आम उत्पादन का करीब 26 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से आता है। ऐसे में यदि पैकिंग, ब्रांडिंग, प्रसंस्करण और निर्यात की व्यवस्था मजबूत हो जाए तो प्रदेश के आम की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में और बढ़ सकती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्रदेश में उद्यान फसलें कुल कृषि क्षेत्र का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा होने के बावजूद उत्पादन और आर्थिक मूल्य में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इसी वजह से सरकार बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
तकनीकी सत्र में किसानों को आम की तुड़ाई के सही तरीके, फसल कटाई के बाद संरक्षण, पैकेजिंग, गुणवत्ता मानकों, निर्यात प्रक्रिया, ब्रांडिंग, प्राकृतिक खेती और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन और गुणवत्ता बनाए रखने से बेहतर कीमत मिल सकती है। साथ ही स्टार्टअप और वैल्यू एडिशन के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई।

इसका क्या पड रहा है असर- यदि ऐसे बायर-सेलर कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते हैं और हुए समझौते जमीन पर लागू होते हैं, तो उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों को नए बाजार मिल सकते हैं। इससे निर्यात बढ़ने, फूड प्रोसेसिंग उद्योग को गति मिलने और किसानों की आय में बढ़ोतरी की संभावना है। आने वाले वर्षों में प्रदेश का आम कारोबार केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहकर वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

VINAY PRAKASH SINGH
Author: VINAY PRAKASH SINGH

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