लखनऊ, 28जुलाई(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। जुलाई 2026 तक प्रदेश में 7.03 लाख से अधिक आवासीय रूफटॉप सोलर संयंत्र लग चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश, गुजरात के बाद ऐसा करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक 11.58 लाख से ज्यादा आवेदन मिले हैं और कुल 2371.14 मेगावाट क्षमता तैयार की जा चुकी है।

ऊर्जा बचत और साफ बिजली को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही इस योजना का असर अब गांवों और शहरों दोनों में दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में परिवार अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा खुद पूरा कर रहे हैं। इससे बिजली बिल में कमी आने के साथ राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी दबाव घट रहा है।
ढाई साल में तेजी से बढ़ी योजना
योजना के विस्तार में ऊर्जा विभाग, यूपीनेडा, बिजली वितरण कंपनियों, बैंकों और जिला प्रशासन की भूमिका रही। ऑनलाइन आवेदन, सब्सिडी और निगरानी की डिजिटल व्यवस्था के कारण लोगों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हुई है। इसी वजह से आवेदन और स्थापना दोनों की गति बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में रूफटॉप सोलर का तेजी से बढ़ना आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन का स्वरूप बदल सकता है। इससे घरों की छतें भी ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बन रही हैं।
करीब 12 हजार एकड़ जमीन की बचत
यदि 2371.14 मेगावाट क्षमता पारंपरिक सोलर पार्कों के जरिए तैयार की जाती, तो इसके लिए लगभग 12 हजार एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती। रूफटॉप मॉडल अपनाने से इतनी बड़ी जमीन बची रही, जिसका इस्तेमाल खेती, उद्योग और अन्य सार्वजनिक जरूरतों के लिए किया जा सकता है।
हर दिन एक करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली
प्रदेश में लगे सोलर संयंत्रों से रोजाना करीब 1.07 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली बनने का अनुमान है। मौजूदा औसत दरों के आधार पर इसकी कीमत लगभग ₹6.94 करोड़ प्रतिदिन बैठती है। इसका सीधा फायदा उन परिवारों को मिल रहा है, जिनके बिजली बिल में कमी आ रही है।
सालाना स्तर पर करीब 389 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पादन का अनुमान है। इससे पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम होगी और बिजली व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यावरण को भी बड़ा फायदा
रूफटॉप सोलर के इस्तेमाल से हर साल करीब 32 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे लाखों वाहनों के प्रदूषण में कमी के बराबर मानते हैं। इसका असर लगभग 14.5 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक वर्ष में किए जाने वाले कार्बन अवशोषण के बराबर बताया जा रहा है।
रोजगार के नए अवसर
योजना के विस्तार से सोलर उद्योग में भी तेजी आई है। प्रदेश में 7,000 से अधिक पंजीकृत कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। इनके जरिए 85 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार बनने का दावा है। इसके अलावा उपकरण निर्माण, परिवहन, बैंकिंग, बीमा और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को भी काम मिला है।
आगे क्या असर होगा
रूफटॉप सोलर की बढ़ती संख्या आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि स्थापना की यही रफ्तार बनी रही तो बिजली बिल में राहत, प्रदूषण में कमी और हरित ऊर्जा निवेश तीनों क्षेत्रों में राज्य को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही स्थानीय उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ने की संभावना है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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