कम बारिश के बीच भी लक्ष्य के करीब पहुंची खरीफ बुआई
लखनऊ,29जुलाई(चौथा प्रहरी)।उत्तर प्रदेश में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई लगभग अपने लक्ष्य तक पहुंच गई है। राज्य सरकार के अनुसार 110 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले करीब 107 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी है। यह लक्ष्य का लगभग 95 प्रतिशत है। बुधवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय पर बीज, खाद और सिंचाई की व्यवस्था होने से किसानों को राहत मिली और खेती की रफ्तार बनी रही।

पिछले साल से बेहतर रहा बुआई का दायरा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष करीब 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई थी। इस बार लक्ष्य भी बढ़ाया गया और उसके मुकाबले अधिक क्षेत्र में खेती हुई है। कृषि विभाग का मानना है कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती बढ़ाने पर जोर देने का असर भी दिखाई दिया है।
इस बार किसानों को अनुदान पर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए गए। साथ ही दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने के लिए मुफ्त मिनी किट भी वितरित किए गए। इससे कम बारिश वाले इलाकों में भी किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने का अवसर मिला।
कम बारिश वाले जिलों पर विशेष नजर
प्रदेश में 28 जुलाई तक औसत से करीब 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। कई जिलों में बारिश की कमी सामान्य से काफी अधिक रही। ऐसे हालात को देखते हुए कृषि विभाग ने कम अवधि में तैयार होने वाली तोरिया की खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है।
सितंबर में किसानों को तोरिया के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए पोर्टल खोल दिया गया है। पात्र किसानों का चयन ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा ताकि वितरण प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
रबी सीजन की तैयारी अभी से शुरू
कृषि विभाग ने रबी सीजन की तैयारी भी समय से शुरू कर दी है। प्रमाणित बीजों के लिए आवेदन पोर्टल पहले ही खोल दिया गया है। सितंबर के पहले सप्ताह में ई-लॉटरी के जरिए किसानों का चयन होगा। इसके बाद समय पर बीज उपलब्ध कराने की योजना है।
विभाग का लक्ष्य इस बार लाखों किसानों तक दलहन और तिलहन के मिनी किट पहुंचाने का है। अधिकारियों का कहना है कि समय से बीज मिलने पर रबी की बुआई में देरी नहीं होगी।
कृषि यंत्रों पर भी मिलेगा अनुदान
सरकार कृषि यंत्रीकरण पर भी जोर दे रही है। कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। फार्म मशीनरी बैंक, कस्टम हायरिंग सेंटर और व्यक्तिगत कृषि यंत्रों के लिए किसानों से आवेदन लिए जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया यहां भी ई-लॉटरी से होगी।
इस योजना का उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों को आधुनिक खेती के उपकरण कम लागत पर उपलब्ध कराना है।
खाद की उपलब्धता पर सरकार का दावा
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उनका दावा है कि किसी भी ब्लॉक में खाद की कमी नहीं है। उन्होंने किसानों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें।
उन्होंने यह भी बताया कि अब सहकारी समितियों का नेटवर्क पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है, जिससे गांव स्तर तक खाद पहुंचाने में सुविधा हो रही है।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान कृषि मंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार की तुलना में मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उर्वरकों की उपलब्धता अधिक होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के दौरान किसानों तक पहले की तुलना में अधिक मात्रा में उर्वरक पहुंचाया गया है। हालांकि यह सरकार का दावा है और विपक्ष इस पर अलग राय रखता रहा है।
आगे क्या असर पड़ेगा?
अगर अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य रहती है तो खरीफ उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं जिन इलाकों में वर्षा कम रही है, वहां अल्प अवधि वाली फसलें किसानों के नुकसान को कम करने में मदद कर सकती हैं। रबी सीजन के लिए अभी से बीज, खाद और कृषि यंत्रों की तैयारी शुरू होने से बुआई समय पर होने की संभावना बढ़ेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता के बीच समय पर इनपुट उपलब्ध कराना इस सीजन की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे अहम तैयारी दोनों होगी।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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