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रामनवमी पर अयोध्या में रामलला का दिव्य सूर्य तिलक, 35 लाख श्रद्धालुओं ने देखा ऐतिहासिक क्षण

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अयोध्या राम मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक दृश्य

अयोध्या, 27 मार्च। पावन नगरी अयोध्या में रामनवमी का पर्व इस वर्ष अभूतपूर्व आस्था, भव्यता और वैज्ञानिक चमत्कार के संगम के रूप में मनाया गया। श्रीराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला का दिव्य ‘सूर्य तिलक’ किया गया, जिसने करोड़ों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

अयोध्या राम मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक दृश्य
राम मंदिर अयोध्या सूर्य तिलक रामलला

दोपहर ठीक 12 बजे सूर्य की स्वर्णिम किरणें विशेष वैज्ञानिक प्रणाली के माध्यम से गर्भगृह में प्रवेश कर रामलला के ललाट पर लगभग चार मिनट तक विराजमान रहीं। यह अद्भुत दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान के अद्भुत समन्वय का जीवंत उदाहरण भी साबित हुआ।
रामलला के प्रकट होते ही मंदिर परिसर में “भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला” और “जय श्रीराम” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु इस दिव्य क्षण को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में एकत्रित होने लगे थे।
लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुसार 26 और 27 मार्च को मिलाकर लगभग 35 लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। केवल राम मंदिर में ही दोपहर तक करीब 3.5 लाख लोगों ने दर्शन किए, जबकि देर रात तक यह संख्या 4 लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया गया।
राम पथ, सरयू घाट और प्रमुख मंदिरों के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। जगह-जगह भंडारे आयोजित हुए, जहां मथुरा से आई लगभग 5 क्विंटल पंजीरी और लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किए गए।
वैज्ञानिक तकनीक से संभव हुआ सूर्य तिलक
इस सूर्य तिलक के पीछे बेंगलुरु के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एक विशेष ऑप्टिकल प्रणाली काम कर रही है। इस तकनीक के जरिए सूर्य की किरणों को सटीक कोण और दिशा में मोड़कर गर्भगृह तक पहुंचाया जाता है, जिससे ठीक दोपहर 12 बजे रामलला के मस्तक पर तिलक संभव हो पाता है।
यह परंपरा हर वर्ष रामनवमी पर दोहराई जाएगी और इसे भारत की प्राचीन ज्योतिषीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम के रूप में देखा जा रहा है।
भव्य सजावट और धार्मिक आयोजन
रामनवमी के अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को फूलों, रंगीन रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया गया था। सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और आरती का सिलसिला चलता रहा। रामलला का अभिषेक किया गया और 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए।
दशरथ महल, कनक भवन और हनुमानगढ़ी सहित अयोध्या के लगभग 8,000 मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, सत्संग और कीर्तन आयोजित हुए। शाम तक रामलीला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया।
मुख्यमंत्री का संदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनवमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रामलला का सूर्य तिलक आस्था, आत्मगौरव और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने इसे भारत की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला बताया।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। अयोध्या को कई जोनों और सेक्टरों में बांटा गया था। ड्रोन निगरानी, एंटी-ड्रोन सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
भीड़ प्रबंधन के लिए होल्डिंग एरिया, बैरिकेडिंग और शटल सेवाएं चलाई गईं। इंटेलिजेंस एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क रहीं, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं की भावनाएं
देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने इस सूर्य तिलक को जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। प्रयागराज से आई श्रद्धालु आस्था ने कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे विश्व को प्रकाशित करने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
वहीं बस्ती से आए संजीव ने कहा कि इस दिव्य दर्शन ने करोड़ों लोगों में नई ऊर्जा और एकता का संचार किया है।
अयोध्या की स्थानीय निवासी कविता के अनुसार, यह आयोजन सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है, जहां आस्था, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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