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यूपी में विकास अब घोषणा नहीं, परिणाम: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना बदलाव का प्रतीक

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लखनऊ, 29 मार्च। उत्तर प्रदेश में विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धरातल पर उतरकर परिणाम के रूप में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में जिस विकास यात्रा की शुरुआत हुई, वह अब ठोस उपलब्धियों के रूप में सामने आ रही है। ‘डबल इंजन’ सरकार के मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो बड़े से बड़े प्रोजेक्ट भी तय समय में पूरे किए जा सकते हैं।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर का एरियल व्यू
जेवर एयरपोर्ट का चित्र photo credit chautha Prahari

इस परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जिसका शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को हुआ था और मात्र कुछ वर्षों में इसका पहला चरण 28 मार्च 2026 को शुरू कर दिया गया। यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात का दबाव कम करेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।
एविएशन सेक्टर में उत्तर प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का निर्माण फरवरी 2022 में शुरू हुआ और दिसंबर 2023 में इसका उद्घाटन हो गया। इस एयरपोर्ट ने अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है। इसके अलावा, आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती में भी हवाई अड्डों के संचालन से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिली है।
सड़क नेटवर्क के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश के दूर-दराज इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। वहीं, निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद राज्य की कनेक्टिविटी और भी मजबूत हो जाएगी।
शहरी परिवहन में भी क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। देश की पहली रैपिड रेल दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (नमो भारत) का संचालन शुरू हो चुका है, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आई है। इसके साथ ही आगरा मेट्रो और मेरठ मेट्रो जैसी परियोजनाओं ने शहरी परिवहन को नई पहचान दी है।
औद्योगिक विकास की बात करें तो यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर ने राज्य को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत बनाया है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट और कानपुर में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस प्लांट के संचालन से उत्तर प्रदेश अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आईटी और डिजिटल सेक्टर में भी उत्तर प्रदेश ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं। ग्रेटर नोएडा में स्थापित योट्टा डेटा सेंटर एशिया के बड़े डेटा हब के रूप में उभरा है। वहीं, Samsung की नोएडा मोबाइल फैक्ट्री ने प्रदेश को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी बना दिया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से वाराणसी में श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिली हैं। वहीं, राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान पर पहुंच गया है।
इन सभी परियोजनाओं ने मिलकर उत्तर प्रदेश की तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश के बढ़ते अवसर, रोजगार सृजन और पर्यटन के विस्तार ने राज्य को तेजी से विकास की राह पर अग्रसर किया है। उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू’ राज्य की छवि से बाहर निकलकर देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का विजन अब केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि साकार होती हुई वास्तविकता बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के विकास का प्रमुख इंजन बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

Chautha Prahari
Author: Chautha Prahari

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