(विनय प्रकाश सिंह)
पत्रकारिता की बदलती भूमिका और मुख्यधारा की मीडिया की घटती विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। डिजिटल दौर में सूचना के कई स्रोत सामने आने के बाद अब पारंपरिक मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती जनता का भरोसा बनाए रखना है। ऐसे समय में निष्पक्ष, तथ्य आधारित और निर्भीक पत्रकारिता को ही मीडिया की साख दोबारा मजबूत करने का रास्ता माना जा रहा है।

विस्तार
पत्रकारिता का उद्देश्य हमेशा जनता तक सही और संतुलित जानकारी पहुंचाना रहा है। मीडिया की जिम्मेदारी केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि सत्ता और व्यवस्था से जवाबदेही भी तय कराना है। जब मीडिया बिना किसी पक्षपात के काम करती है, तब उसकी विश्वसनीयता मजबूत होती है।
बीते कुछ वर्षों में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदला है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने सूचना के प्रवाह को पूरी तरह बदल दिया है। अब कोई भी व्यक्ति किसी घटना की तस्वीर, वीडियो या जानकारी कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंचा सकता है। ऐसे माहौल में यदि किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को मुख्यधारा की मीडिया पर्याप्त स्थान नहीं देती, तो वही विषय सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन जाता है।
हालांकि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी का खतरा भी बना रहता है, लेकिन कई बार ऐसे मुद्दे भी सामने आए हैं जिन्हें बाद में मुख्यधारा की मीडिया को भी प्रमुखता से उठाना पड़ा। इससे साफ है कि सूचना का एकाधिकार अब किसी एक माध्यम के पास नहीं है।
नई पीढ़ी, खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय युवा, खबरों को केवल एक स्रोत से नहीं देखते। वे अलग-अलग माध्यमों से जानकारी जुटाते हैं, तथ्यों की तुलना करते हैं और सवाल भी पूछते हैं। इसलिए आधी जानकारी या एकतरफा प्रस्तुति अब पहले जैसी स्वीकार नहीं की जाती।
पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी कसौटी आज भी वही है जो पहले थी—सत्य, निष्पक्षता और जनहित। किसी भी सरकार, राजनीतिक दल या प्रभावशाली व्यक्ति के पक्ष या विरोध में खड़े होने के बजाय मीडिया को तथ्यों के आधार पर काम करना होगा। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारिता की प्रतिष्ठा सरकारी मंचों, पुरस्कारों या सत्ता के करीब रहने से नहीं बढ़ती। उसका सम्मान तब बनता है जब आम नागरिक यह महसूस करे कि उसकी समस्याओं और सवालों को बिना किसी दबाव के सामने रखा जा रहा है।
भविष्य के निहितार्थ
सूचना के इस दौर में मीडिया संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरोसा बचाए रखना है। यदि मुख्यधारा की मीडिया निष्पक्ष रिपोर्टिंग, तथ्य जांच और जनहित को प्राथमिकता देती है, तो उसकी विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है। लेकिन यदि जनता का विश्वास लगातार कमजोर होता रहा, तो लोग वैकल्पिक माध्यमों की ओर और तेजी से बढ़ेंगे। ऐसे में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका भी प्रभावित हो सकती है।
Author: VINAY PRAKASH SINGH
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